17 फरवरी को धरती के सबसे ठंडे महाद्वीप अंटार्कटिका में एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिली—अंगुलाकार सूर्यग्रहण। इसे आम बोलचाल में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। आइए समझते हैं कि यह घटना क्या होती है और अंटार्कटिका में इसका दृश्य इतना खास क्यों था।
क्या है अंगुलाकार सूर्यग्रहण?
जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तो सूर्यग्रहण होता है। लेकिन हर बार चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। जब चंद्रमा अपनी कक्षा के सबसे दूर बिंदु, यानी एपोजी पर होता है, तब उसका आकार हमें थोड़ा छोटा दिखाई देता है। ऐसे में वह सूर्य के केंद्र को ढक लेता है, लेकिन किनारों को नहीं। परिणामस्वरूप सूर्य के चारों ओर एक चमकदार रिंग बन जाती है—इसे ही ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
अंटार्कटिका में क्यों खास था यह नज़ारा?
अंटार्कटिका पृथ्वी का सबसे अलग-थलग और कम आबादी वाला महाद्वीप है। यहां का साफ वातावरण और कम प्रकाश प्रदूषण खगोलीय घटनाओं को देखने के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करता है। इस बार का ग्रहण सुबह के समय शुरू हुआ और लगभग दो मिनट तक ‘रिंग ऑफ फायर’ स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कॉन्सॉर्डिया रिसर्च स्टेशन पर मौजूद शोधकर्ताओं ने इसे विशेष उपकरणों के साथ देखा।
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क्या हुआ उस दौरान?
ग्रहण के समय रोशनी कम हो गई, लेकिन पूर्ण अंधेरा नहीं छाया। बर्फ से ढके मैदानों पर सुनहरी रोशनी का प्रतिबिंब पड़ रहा था। तेज हवाओं और ठंड के बीच यह दृश्य किसी स्वप्न जैसा प्रतीत हो रहा था। वैज्ञानिकों ने इसे कैमरों में कैद किया और बताया कि यह उनके जीवन के यादगार क्षणों में से एक था।
अन्य स्थानों पर प्रभाव
हालांकि इस ग्रहण की आंशिक झलक दक्षिणी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में भी देखी गई, लेकिन पूर्ण और स्पष्ट ‘रिंग ऑफ फायर’ का दृश्य मुख्य रूप से अंटार्कटिका के दूरस्थ इलाके में ही संभव था।
वैज्ञानिक महत्व
ऐसे ग्रहण वैज्ञानिकों को सूर्य के बाहरी हिस्सों और पृथ्वी के वातावरण पर प्रकाश के प्रभाव का अध्ययन करने का अवसर देते हैं। साथ ही, यह हमें ब्रह्मांड की जटिल और सुंदर गतियों को समझने का मौका भी देते हैं।
अंटार्कटिका की बर्फीली खामोशी में चमकती सूर्य की यह अंगूठी सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं थी, बल्कि प्रकृति की अद्भुत कला का प्रदर्शन थी—एक ऐसा दृश्य जिसे देखने वाले शायद कभी न भूलें।