क्रिकेट में फॉर्म आता-जाता रहता है, लेकिन जब खराब दौर लंबा खिंच जाए तो सबसे मजबूत खिलाड़ी भी दबाव में आ जाता है। भारतीय टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। 468 दिन तक अर्धशतक के इंतजार ने उनके आत्मविश्वास को जरूर झकझोरा, लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में उन्होंने दिखा दिया कि क्लास कभी खत्म नहीं होती।
साल 2025 सूर्या के लिए बेहद कठिन रहा। मैच दर मैच उम्मीदें टूटीं, रन नहीं आए और आलोचनाएं बढ़ती चली गईं। टी20 वर्ल्ड कप से पहले कप्तान के बल्ले का शांत रहना टीम इंडिया के लिए चिंता का विषय बन चुका था। पहले टी20 में 32 रन की पारी ने संकेत दिए कि कुछ बदलेगा, लेकिन असली जवाब दूसरे मैच में आया।
468 दिन का इंतजार खत्म
सूर्यकुमार यादव ने सिर्फ 23 गेंदों में अर्धशतक जड़कर अपने आलोचकों को चुप करा दिया। यह उनका अक्टूबर 2024 के बाद पहला टी20 अर्धशतक था। उन्होंने कुल 82 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें उनका पुराना अंदाज साफ नजर आया—360 डिग्री शॉट्स, बेखौफ बल्लेबाजी और कप्तानी की जिम्मेदारी।
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कप्तानी के दबाव में भी चमका बल्ला
इस पारी के साथ सूर्या न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में भारतीय कप्तान के तौर पर सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए। विराट कोहली का रिकॉर्ड टूटना इस बात का संकेत है कि सूर्या अब सिर्फ कप्तान नहीं, मैच विनर के रूप में भी लौट आए हैं।
इस पारी ने सूर्यकुमार को केएल राहुल से आगे पहुंचा दिया। अब वह न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन चुके हैं। इसके अलावा रनचेज के दौरान छक्कों के मामले में उन्होंने विराट कोहली को भी पीछे छोड़ दिया।
मानसिक मजबूती की जीत
यह पारी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि मानसिक मजबूती और धैर्य की मिसाल भी है। लंबे समय तक खराब फॉर्म में रहने के बावजूद सूर्या ने अपना गेम नहीं बदला और सही मौके का इंतजार किया।
टी20 वर्ल्ड कप से पहले कप्तान का इस तरह फॉर्म में लौटना ड्रेसिंग रूम के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। सूर्यकुमार यादव की यह पारी बताती है कि मुश्किल वक्त में भी बड़े खिलाड़ी बड़े मौके पर खड़े हो सकते हैं।