बलात्कार जैसे जघन्य अपराध को लेकर नेताओं की जिम्मेदारी हमेशा से सवालों के घेरे में रही है। लेकिन मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के हालिया बयान ने इस बहस को और गहरा कर दिया है। उन्होंने जिस तरह यौन हिंसा को “खूबसूरत लड़की को देखकर मन भटकने” से जोड़ा, उसे लेकर देशभर में नाराजगी देखने को मिल रही है।
बरैया ने एक इंटरव्यू में कहा कि कोई भी पुरुष अगर बेहद सुंदर लड़की को देखता है तो उसका दिमाग विचलित हो सकता है और बलात्कार हो सकता है। यह कथन न सिर्फ अपराध की गंभीरता को कमतर आंकता है, बल्कि पीड़िता को ही जिम्मेदार ठहराने की सोच को भी बढ़ावा देता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे बयान दशकों से चली आ रही पीड़िता-दोषी मानसिकता को मजबूत करते हैं।
इस बयान को और विवादास्पद बनाते हुए विधायक ने जातिगत संदर्भ भी जोड़े। उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी समुदायों की महिलाएं अधिक “खूबसूरत” होती हैं, इसलिए उन्हें ज्यादा निशाना बनाया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक ग्रंथों की विकृत व्याख्याओं का हवाला देते हुए कहा कि कुछ अपराधी यौन हिंसा को पुण्य से जोड़कर देखते हैं।
महिला अधिकार संगठनों ने इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि बलात्कार का कारण किसी महिला का रूप नहीं, बल्कि अपराधी की मानसिकता और सत्ता का दुरुपयोग होता है। उनका कहना है कि इस तरह की बातें समाज में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गलत संदेश देती हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तीखी रही। भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बयान पार्टी की असली सोच को उजागर करता है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ऐसे बयानों पर चुप्पी साधे रहता है, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है।
विवाद के बाद विधायक बरैया ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया कि वे महिलाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज में मौजूद विकृत सोच को सामने ला रहे थे। उन्होंने धार्मिक ग्रंथ “रुद्रयामल तंत्र” का हवाला देते हुए कहा कि अपराधी इसी तरह की मान्यताओं से प्रभावित होते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक मंच से कही गई बातें जिम्मेदारी के साथ रखी जानी चाहिए। ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर असावधानी भरे बयान न केवल राजनीतिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करते हैं।