- अपर्णा यादव ने VC सोनिया नित्यानंद से पूछे 8 तीखे सवाल
लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में गिने जाने वाले KGMU में महिला डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण से जुड़े मामलों ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे प्रदेश में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने KGMU की वाइस चांसलर प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद से सीधी बातचीत कर कड़े सवाल पूछे।
अपर्णा यादव ने इस बातचीत में स्पष्ट किया कि KGMU में सामने आ रही घटनाएं केवल व्यक्तिगत मामले नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े और संवेदनशील मेडिकल संस्थान में महिला डॉक्टरों का शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न लगातार क्यों हो रहा है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि विशाखा कमेटी जैसी आंतरिक जांच समितियां पीड़िताओं को न्याय दिलाने में असफल क्यों साबित हो रही हैं और उनकी रिपोर्ट्स पर बार-बार संदेह क्यों उठता है।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने यह भी पूछा कि KGMU प्रशासन धर्मांतरण जैसे गंभीर मुद्दों पर सख्त और समयबद्ध कार्रवाई क्यों नहीं करता। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि विभाग की ओर से कई अहम जानकारियां सरकार से क्यों छिपाई जाती हैं और ब्लड स्टोरेज जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं आखिर क्यों बंद पड़ी रहीं। अपर्णा यादव का कहना था कि अगर संस्थान पारदर्शिता से काम कर रहा होता, तो ऐसे सवाल पैदा ही नहीं होते।
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इस पूरे विवाद के केंद्र में KGMU से जुड़ा कथित ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण का मामला भी है। हाल ही में एक महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया था कि उसी संस्थान में कार्यरत एक रेजिडेंट डॉक्टर ने उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। मामला सामने आने के बाद आरोपी डॉक्टर रमीज को निलंबित कर दिया गया। पीड़िता ने इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल और महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई।
अपर्णा यादव ने यह भी सवाल उठाया कि KGMU की महिला पीड़िताओं को महिला आयोग तक पहुंचने से क्यों रोका जाता है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ “स्वस्थ भारत” का सपना देख रहे हैं, तब KGMU जैसी संस्था में इस तरह की घटनाएं उस सपने को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका कहना था कि मेडिकल संस्थान सिर्फ इलाज के केंद्र नहीं होते, बल्कि भरोसे और सुरक्षा के प्रतीक भी होते हैं।
महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने इससे पहले 22 दिसंबर 2025 को इस मामले में उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। फिलहाल, KGMU प्रशासन की भूमिका और जांच की निष्पक्षता पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यह मामला न सिर्फ KGMU की छवि से जुड़ा है, बल्कि महिला सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों का भी बड़ा प्रश्न बन चुका है।