दूषित पानी से 15 मौतें, राहुल गांधी बोले सिस्टम की विफलता है

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published by sweta sharma

इंदौर, जिसे वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता रहा है, आज एक गंभीर स्वास्थ्य त्रासदी का सामना कर रहा है। दूषित पेयजल के कारण फैली उल्टी-दस्त की बीमारी ने अब तक 15 लोगों की जान ले ली है और सैकड़ों परिवारों को संकट में डाल दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों ने समय रहते गंदे पानी की शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं। परिणामस्वरूप, आम नागरिकों को सीवर मिला पानी पीने पर मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार इस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। जिन घरों में मौतें हुईं, वहां सरकार की ओर से संवेदना और जिम्मेदारी की बजाय चुप्पी देखने को मिली। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि स्वच्छ पानी जीवन का अधिकार है, और जब सरकार इस अधिकार की रक्षा नहीं कर पाती, तो उसे जवाब देना चाहिए।

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स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन में रिसाव था। उसी स्थान पर बने शौचालय के कारण सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल गया, जिससे संक्रमण तेजी से फैला। अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि महामारी का मूल कारण दूषित पेयजल ही है।

रिपोर्ट के अनुसार, हजारों घरों की जांच की गई है और सैकड़ों लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। कई मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शहरी बुनियादी ढांचे की अनदेखी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।

राहुल गांधी ने इस पूरे मामले में पारदर्शी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। इंदौर की यह त्रासदी केवल एक शहर की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी है कि बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही की कीमत आम जनता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

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