महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नाना पटोले के एक बयान ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। नाना पटोले ने लोकसभा सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से करते हुए कहा कि राहुल गांधी आज भगवान राम की विचारधारा और उनके पदचिह्नों पर काम कर रहे हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इंडिया टीवी से बातचीत के दौरान नाना पटोले ने कहा कि जिस तरह त्रेता युग में भगवान राम ने शोषित, पीड़ित और कमजोर वर्गों को न्याय दिलाने का काम किया था, उसी तरह राहुल गांधी आज देश की जनता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पटोले ने कहा कि आज देश में किसान, मजदूर, युवा और आम नागरिक कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं और राहुल गांधी उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
नाना पटोले ने स्पष्ट किया कि वह राहुल गांधी को भगवान राम के समकक्ष नहीं रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “भगवान भगवान हैं और हम इंसान हैं। लेकिन भगवान राम की विचारधारा—न्याय, करुणा, मर्यादा और सत्य—उसी रास्ते पर राहुल गांधी चल रहे हैं।” पटोले ने यह भी कहा कि यदि किसी नेता का उद्देश्य पीड़ितों को न्याय दिलाना और संविधान की रक्षा करना है, तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है।
राम मंदिर और अयोध्या दर्शन को लेकर उठ रहे सवालों पर नाना पटोले ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा बार-बार यह मुद्दा उठाती है कि राहुल गांधी अयोध्या क्यों नहीं गए, लेकिन आस्था किसी प्रदर्शन की चीज नहीं होती। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में रामलला के दर्शन और भूमि पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिससे कांग्रेस की धार्मिक आस्था पर सवाल उठाना गलत है।
इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि भगवान राम से किसी राजनीतिक नेता की तुलना करना आस्था का अपमान है और कांग्रेस सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रही है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा खुद भगवान राम के नाम पर राजनीति करती है और दूसरों पर सवाल उठाना उसका दोहरा चरित्र दर्शाता है।
मुंबई मेयर विवाद पर भी नाना पटोले ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मेयर हिंदी भाषी हो या मराठी भाषी, यह मुद्दा नहीं है। असली मुद्दा बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार है, जिस पर सरकार को जवाब देना चाहिए। हिंदू मेयर को लेकर दिए गए बयानों पर उन्होंने कहा कि धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करना जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है।
कुल मिलाकर, नाना पटोले के बयान ने कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर कांग्रेस इसे विचारधारा की बात बता रही है, वहीं भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर मुद्दा बना रही है। आने वाले दिनों में यह बयान महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।