- स्कूल मर्जर, शिक्षक भर्ती और सोशल मीडिया कंटेंट पर विपक्ष का तीखा वार
उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र की कार्यवाही के दौरान शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरने की कोशिश की। सदन की शुरुआत परिषदीय स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता, स्कूल मर्जर नीति और शिक्षकों की भर्ती को लेकर सवालों के साथ हुई। विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर हो रही है और शिक्षकों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सोशल मीडिया पर फैल रहे अश्लील कंटेंट का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। सपा विधायक ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना किसी चेतावनी के अशोभनीय और नग्न सामग्री परोसी जा रही है, जिसका सीधा असर समाज और युवाओं पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस तरह के कंटेंट पर नियंत्रण के लिए अब तक ठोस नीति क्यों नहीं बनाई गई। विधायक ने यह भी कहा कि जब युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, तो रील बनाने की बात कही जाती है, लेकिन उस पर नियंत्रण की जिम्मेदारी से सरकार पीछे हट जाती है।

सत्र के दौरान सपा विधायक अतुल प्रधान किसान दिवस के अवसर पर गन्ना लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने कहा कि सदन में किसानों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान और कृषि नीति को लेकर सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया।
निजी स्कूलों के मुद्दे पर सपा विधायक आर.के. वर्मा ने अभिभावकों के शोषण का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं और आरटीई कानून के तहत गरीब बच्चों को मिलने वाला 25 प्रतिशत आरक्षण सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने मांग की कि निजी स्कूलों में भी सरकारी स्कूलों की तरह किताबें और फीस संरचना तय की जाए।
शिक्षक भर्ती को लेकर सपा विधायक सचिन यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 1.5 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं और पिछले छह वर्षों से कोई बड़ी भर्ती नहीं की गई है। शिक्षकों से चुनाव ड्यूटी, सर्वे, मिड-डे मील जैसी जिम्मेदारियां कराई जा रही हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि किसी भी स्कूल को बंद नहीं किया गया है। केवल एक किलोमीटर के दायरे में स्थित कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का मर्जर किया गया है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों के स्वीकृत पद समाप्त करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन तबादला प्रणाली व कैशलेस इलाज जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं।