असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भड़की हिंसा के बाद अब हालात धीरे-धीरे नियंत्रण में आते नजर आ रहे हैं। पुलिस के अनुसार सोमवार रात के बाद से किसी नई हिंसक घटना की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में निषेधाज्ञा लागू है, जबकि कार्बी आंगलोंग जिले में शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक रात्रि कर्फ्यू जारी रखा गया है। हिंसा की शुरुआत उस वक्त हुई, जब प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के प्रमुख तुलिराम रोंगहांग के आवास और खेरोनी बाजार में कई दुकानों में आग लगा दी। इसके अलावा पुलिस स्टेशन पर हमला करने की कोशिश भी की गई, जिसे सुरक्षा बलों ने समय रहते विफल कर दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विवाद की जड़ पीजीआर (Professional Grazing Reserve) और वीजीआर (Village Grazing Reserve) भूमि से जुड़ी है। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन आरक्षित जमीनों पर बाहरी लोगों द्वारा अवैध कब्जा किया गया है। पिछले साल प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कोशिश की थी, लेकिन मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट पहुंच गया, जहां से बेदखली पर अंतरिम रोक लग गई। असम सरकार के वरिष्ठ मंत्री रानोज पेगू और डीजीपी हरमीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर हालात की समीक्षा की। पेगू ने बताया कि पड़ोसी जिलों से अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और प्रशासन प्रदर्शनकारियों तथा अतिक्रमणकारियों दोनों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हिंसा के पीछे अफवाह को बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि यह गलत सूचना फैलाई गई कि भूख हड़ताल पर बैठे तीन प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे हालात बेकाबू हो गए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, बल्कि तीनों को स्वास्थ्य बिगड़ने पर इलाज के लिए गुवाहाटी भेजा गया था। सोमवार को हुई झड़प के दौरान पुलिस फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारी और एक पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रशासन का कहना है कि अब स्थिति पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है और शांति बहाल करना प्राथमिकता है।