लियोनेल मेसी जैसे वैश्विक फुटबॉल आइकन का नाम जुड़ा हो और कार्यक्रम अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाए, तो नाराजगी स्वाभाविक है। कोलकाता में आयोजित मेसी इवेंट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सॉल्ट लेक इलाके में हुए इस कार्यक्रम में हजारों फैंस उम्मीदों के साथ पहुंचे थे, लेकिन भीड़, अव्यवस्था और तोड़फोड़ ने पूरे आयोजन को विवादों में ला खड़ा किया।
कार्यक्रम के बीच ही हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। कई फैंस ने आरोप लगाया कि टिकट होने के बावजूद उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई और कार्यक्रम तय रूप में आगे नहीं बढ़ पाया। सोशल मीडिया पर नाराज फैंस के वीडियो और पोस्ट वायरल होने लगे, जिससे सरकार की भी तीखी आलोचना होने लगी।
स्थिति को संभालने के लिए ममता सरकार ने त्वरित कदम उठाया। सरकार के आदेश पर कार्यक्रम कराने वाले आयोजक को हिरासत में ले लिया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से मेसी के फैंस से माफी मांगते हुए भरोसा दिलाया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट खरीदने वाले सभी दर्शकों को पूरा रिफंड दिया जाएगा। डीजीपी राजीव कुमार ने कहा कि इस तरह के आयोजनों में जनता की सुरक्षा और भरोसा सर्वोपरि होता है। अगर आयोजकों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आयोजन से पहले दी गई जानकारियां और जमीनी हकीकत में कितना अंतर था।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स को आयोजित करने से पहले क्या पर्याप्त तैयारी की जाती है या नहीं। खेल प्रेमियों का मानना है कि मेसी जैसे खिलाड़ियों के नाम पर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। सरकार के रिफंड ऐलान से भले ही गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ हो, लेकिन आयोजकों की जवाबदेही तय करना अब भी सबसे बड़ी मांग बनी हुई है।