ओडिशा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम ने सोनिया गांधी को एक पांच पन्नों का विस्तृत पत्र लिखकर पार्टी के भीतर गहरे संगठनात्मक संकट और वैचारिक कमजोरी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ चुनाव नहीं हार रही, बल्कि अपने ही फैसलों और नेतृत्व की गलतियों के कारण एक सदी पुरानी विरासत को खोने की कगार पर है।
मोकिम के अनुसार बिहार, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर में हालिया चुनाव परिणाम केवल हार नहीं बल्कि पार्टी के प्रति जमीनी स्तर पर बढ़ते अलगाव का संकेत हैं। उन्होंने ओडिशा में लगातार छह चुनावों में हार और लोकसभा चुनावों में तीन बार पराजय पर भी चिंता जताई। मोकिम ने लिखा कि यह गिरावट बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर गलत नेतृत्व विकल्प, कमजोर संगठन और गलत हाथों में जिम्मेदारी देने से हुई है।
“महोदया, मैं बड़ी पीड़ा में लिख रहा हूं” — मोकिम
अपने पत्र की शुरुआत में मोकिम ने लिखा कि वह सोनिया गांधी को अत्यंत दुख के साथ यह पत्र भेज रहे हैं क्योंकि पार्टी की वर्तमान स्थिति उनके जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते पार्टी ने सुधार नहीं किए तो कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक पहचान खो सकती है। अभी तक सोनिया गांधी या पार्टी की ओर से इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राहुल गांधी से मुलाकात न होना—कार्यकर्ताओं के अलगाव का संकेत
मोकिम ने अपनी शिकायतों की लंबी सूची में यह भी लिखा कि वह पिछले तीन सालों से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि पूरे देश में कार्यकर्ताओं में बढ़ते ‘अलगाव’ और ‘अनदेखेपन’ का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता खुद को सुना हुआ महसूस नहीं करते, जिससे संगठन कमजोर हो रहा है।
खरगे के नेतृत्व पर सवाल
मोकिम ने पत्र में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि 83 वर्षीय खरगे भारत के 65% युवा वोटबैंक से जुड़ने में सफल नहीं हो पाए हैं। उनका मानना है कि पार्टी को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो युवा ऊर्जा, नए विचारों और जमीनी रणनीतियों को समझ सके।
प्रियंका गांधी को सक्रिय नेतृत्व देने का सुझाव
मोकिम ने प्रियंका गांधी को केंद्रीय भूमिका में लाने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट, डी.के. शिवकुमार, रेवंत रेड्डी और शशि थरूर जैसे नेताओं को भी पार्टी नेतृत्व की मुख्य टीम का आधार बनना चाहिए।
उनका मानना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवरा, और हिमंत बिस्वा सरमा जैसे युवा नेताओं का कांग्रेस से जाना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी में उभरती प्रतिभाओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा था।
गहरे संगठनात्मक संकट का संकेत
मोकिम ने कहा कि पार्टी की मौजूदगी भौगोलिक और संगठनात्मक स्तर पर लगातार सीमित होती जा रही है। जमीनी कार्यकर्ता भावनात्मक तौर पर टूट रहे हैं, और यही स्थिति पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
उन्होंने चेताया कि यदि कांग्रेस तुरंत संरचनात्मक सुधार नहीं करती, तो आने वाले वर्षों में पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका और कमजोर हो सकती है।
कार्यकर्ताओं की आवाज़ नहीं सुनी जा रही—मुख्य चिंता
मोकिम के अनुसार कांग्रेस की हार सिर्फ राजनीतिक घटनाएं नहीं बल्कि एक बड़े भावनात्मक और संगठनात्मक टूटाव का परिणाम हैं। उन्होंने पार्टी को आगाह किया कि नेतृत्व को कार्यकर्ताओं, नेताओं और मतदाताओं के बीच बढ़ती दूरी को तुरंत कम करना होगा।