बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठियों पर CM योगी सख्त, गोरखपुर में तैयार हुआ डिटेंशन सेंटर

उत्तर प्रदेश न्यूज़

उत्तर प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों पर सख्त कार्रवाई के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्यभर में डिटेंशन सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जहां अवैध घुसपैठियों को पहचान कर रखा जाएगा। इसी क्रम में गोरखपुर में भी एक नया डिटेंशन सेंटर तैयार किया गया है, जिसे एक पुराने रैन बसेरा को परिवर्तित कर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इस कदम को राज्य की सुरक्षा नीति के तहत बड़ा और निर्णायक प्रयास माना जा रहा है।

रैन बसेरा को बदला गया डिटेंशन सेंटर में

गोरखपुर का यह डिटेंशन सेंटर शाहपुर थाना क्षेत्र के गीता वाटिका के पास बनाया गया है। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त दुर्गेश सिंह ने बताया कि यह सेंटर तीन मंजिला इमारत में तैयार किया गया है। इसमें कुल 16 कमरे, 50 बेड, शुद्ध पेयजल, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि यदि सर्वे और जांच के दौरान कोई भी अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिया चिह्नित होता है, तो उसे इसी सेंटर में रखा जाएगा। वर्तमान में जिले में ऐसी कोई बड़ी गतिविधि सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

सेंटर में उपलब्ध होंगी मूलभूत सुविधाएं

डिटेंशन सेंटर के केयरटेकर सुजीत सिंह ने बताया कि यहां रखे जाने वाले लोगों के लिए सभी मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम किया गया है। सेंटर में साफ-सफाई, बिजली, भोजन की व्यवस्था, बेड और सुरक्षा प्रबंध शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह सेंटर तैयार है और जैसे ही किसी अवैध घुसपैठिए को यहां भेजने की जरूरत पड़ेगी, तुरंत सभी व्यवस्था की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में बढ़ रही चौकसी

राज्य सरकार लंबे समय से अवैध घुसपैठियों पर सख्त रुख अपना रही है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार जिलों में सर्वे कर रहा है। योगी सरकार का मानना है कि अवैध रूप से रह रहे लोग सुरक्षा व्यवस्था और जनसांख्यिकी पर प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए उन्हें चिह्नित कर प्रक्रियागत कार्रवाई आवश्यक है। इसी उद्देश्य से डिटेंशन सेंटर पूरे राज्य में रणनीतिक रूप से विकसित किए जा रहे हैं।

देश में पहला डिटेंशन सेंटर असम में बना था

डिटेंशन सेंटर की शुरुआत भारत में असम राज्य से हुई थी। वर्ष 2008 में गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश के बाद असम में अवैध प्रवासियों को रखने के लिए जेल परिसरों के भीतर अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। बाद में राज्य ने बड़े पैमाने पर स्थायी सेंटर विकसित करने का काम शुरू किया।

अब उत्तर प्रदेश भी उसी मॉडल पर काम कर रहा है, ताकि अवैध घुसपैठियों की पहचान, निगरानी और कानूनी कार्रवाई सुव्यवस्थित तरीके से की जा सके।

गोरखपुर में डिटेंशन सेंटर का तैयार होना उत्तर प्रदेश में सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि राज्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अवैध घुसपैठ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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