अमृतसर-विशाखापट्टनम-हीराकुंड एक्सप्रेस में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया जब ट्रेन में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना रेलवे सुरक्षा बल को दी गई। यह घटना उत्तर प्रदेश के झांसी स्टेशन पर हुई, जहाँ सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रेन को रोककर सघन जांच शुरू कर दी। सूचना इतनी गंभीर थी कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और पुलिस की टीम ने तुरंत पूरी ट्रेन का कोना-कोना खंगालना शुरू कर दिया। यात्रियों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लगभग 30 मिनट की खोजबीन के बाद कोई संदिग्ध व्यक्ति या सामान नहीं मिला, जिसके बाद दोपहर करीब साढ़े तीन बजे ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया।
रेलवे पुलिस अधीक्षक विपुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि RPF नियंत्रण कक्ष को संदेश मिला था कि ट्रेन में तीन संदिग्ध आतंकवादी सफर कर रहे हैं। इस सूचना को अत्यंत गंभीर मानते हुए टीम को अलर्ट किया गया और झांसी स्टेशन पर पहुंचते ही ट्रेन की बारीकी से तलाशी ली गई। जांच में कुछ भी असामान्य न मिलने पर अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
जांच के दौरान यह सामने आया कि यह पूरी सूचना एक झूठे विवाद के कारण फैली थी। इससे ठीक पहले ट्रेन मध्य प्रदेश के दतिया स्टेशन पहुँची थी, जहाँ सीट को लेकर चार यात्रियों के बीच तीखी बहस हो गई थी। मामला इतना बढ़ा कि RPF और स्थानीय पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बहस कर रहे चार यात्रियों को ट्रेन से उतार दिया गया।
पूछताछ में पता चला कि सीट विवाद में शामिल एक यात्री ने गुस्से में आकर नियंत्रण कक्ष को सूचना दी थी कि बाकी तीन यात्री आतंकवादी हैं। उसकी इस झूठी शिकायत ने न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को भारी असुविधा में डाला बल्कि पूरे ट्रेन संचालन को भी प्रभावित किया।
चारों यात्रियों की पहचान एबॉट मार्केट निवासी रमेश पासवान तथा तालपुरा के रहने वाले बिलाल जीलानी, इशान खान और फैजान (सभी झांसी निवासी) के रूप में हुई है। रेलवे पुलिस अब उनसे पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि झूठी सूचना देने के लिए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि इस तरह की हरकतें सुरक्षा प्रणाली का दुरुपयोग करती हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरे में डाल सकती हैं।