भारत का पड़ोसी देश नेपाल एक बार फिर भूकंप के झटकों से कांप उठा है। रविवार दोपहर सुदूर पश्चिम प्रांत के बझांग जिले में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 दर्ज की गई। नेशनल अर्थक्वेक मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर (NEMRC) के अनुसार भूकंप स्थानीय समय दोपहर 12:09 बजे आया और इसका केंद्र बझांग जिले के साइपाल पर्वत क्षेत्र में था। हालांकि, अभी तक किसी भी तरह के बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
भूकंप के झटके केवल बझांग तक सीमित नहीं रहे। पड़ोसी जिलों, विशेष रूप से बाजुरा जिले के कई इलाकों में भी लोगों ने कंपकंपी महसूस की। अचानक धरती हिलने के बाद लोग अपने-अपने घरों से घबराकर बाहर निकल आए। कुछ देर तक हलचल का माहौल बना रहा। जब दोबारा झटका नहीं आया, तब लोगों ने राहत की सांस ली।
बझांग: नेपाल का सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्र
बझांग जिला नेपाल के उन इलाकों में से एक है, जो भूकंपीय दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। यह क्षेत्र सीसमिक जोन-4 और जोन-5, यानी नेपाल के सबसे सक्रिय टेक्टोनिक ज़ोन में आता है। यही कारण है कि यहां सालभर में कई बार मध्यम से हल्के भूकंप आते रहते हैं। लगातार जमीन के भीतर हो रही गतिविधियां यहां के लोगों के लिए चिंता का विषय बनी रहती हैं।
बीते कुछ दिनों में नेपाल में भूकंप की गतिविधियां बढ़ गई हैं। कुछ दिन पहले भी दो बार झटके महसूस किए गए थे, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। नेपाल भूगर्भीय रूप से हिमालयन फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जो भारत और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से बनी है। यह इलाका प्राकृतिक रूप से भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील माना जाता है।
लोगों में दहशत, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं
हालिया भूकंप के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी जरूर मची, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर खड़े रहने की अपील की है। साथ ही, आपातकालीन टीमें हालात पर निगरानी बनाए हुए हैं।
लगातार आ रहे झटके एक बार फिर नेपाल की भूकंप संबंधी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के हल्के झटके बड़ी ऊर्जा मुक्त करने में मदद करते हैं, लेकिन बड़े भूकंप की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।