मुंबई में होने वाले आगामी बीएमसी चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि बीएमसी चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ेगी।
हाल ही में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शरद पवार से मुलाकात कर बीएमसी चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के साथ आने पर चर्चा की थी। कांग्रेस महाविकास अघाड़ी को फिर से मजबूत करना चाहती थी और उसका कहना था कि मनसे (मनसे) को गठबंधन से बाहर रखा जाए। लेकिन शरद पवार की पार्टी ने राज और उद्धव—दोनों ठाकरे ब्रदर्स के साथ जाने का निर्णय लेकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
बीजेपी को हराने की रणनीति
एनसीपी (एसपी) नेताओं का कहना है कि बीएमसी में बीजेपी को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होना आवश्यक है। इसी वजह से पार्टी ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का साथ देने का फैसला लिया है। हालांकि, मनसे ने यह साफ किया है कि वह महाविकास अघाड़ी का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद पवार का यह फैसला शिवसेना (यूबीटी) और मनसे को एक मंच पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस के भीतर मतभेद उजागर
कांग्रेस में मनसे को साथ लेने को लेकर गहरा मतभेद देखने को मिला है। एबीपी माझा की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा था कि शरद पवार का मानना है कि सभी विपक्षी दलों को मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए ताकि बीजेपी को रोका जा सके। उन्होंने संकेत दिया था कि मनसे को शामिल करने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
लेकिन मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ ने इस संभावना को साफ तौर पर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “हम उन पार्टियों के साथ नहीं जाएंगे जिनसे हमारा वैचारिक संघर्ष रहा है। हमारा रुख स्पष्ट है—हम समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ ही बात करेंगे।”
कांग्रेस अकेले मैदान में
शरद पवार के निर्णय के बाद अब संभावना है कि कांग्रेस बीएमसी चुनाव में अकेले उतरकर अपने संगठन और पुराने वोट बैंक पर भरोसा करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि ठाकरे ब्रदर्स और पवार का यह नया गठजोड़ मुंबई की राजनीति में क्या बदलाव लाता है।