मन की बात का 139वां एपिसोड, पीएम मोदी ने की स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील

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देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड के माध्यम से देश और दुनिया के नागरिकों के साथ अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम के सफर को याद करते हुए इसे एक पवित्र तीर्थयात्रा की संज्ञा दी और देशवासियों के सामूहिक प्रयासों, समर्पण तथा सेवा-भाव की खुलकर सराहना की। आज से ठीक 12 वर्ष पूर्व विजयादशमी के पावन अवसर पर शुरू हुए इस संवाद का यह कारवाँ बिना रुके निरंतर आगे बढ़ रहा है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने से प्रेरणादायक कहानियाँ सामने आती रही हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में त्योहारी सीजन का विशेष रूप से उल्लेख किया और ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) के संकल्प को देश की आर्थिक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आज त्योहारों के इस उल्लासपूर्ण माहौल में लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह जन-भावना अब हमारे स्थानीय उत्पादों को केवल देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के वैश्विक बाजारों तक पहुँचा रही है। उदाहरणस्वरूप, बिहार का पौष्टिक मखाना और कर्नाटक की प्रसिद्ध अरहर दाल आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना रहे हैं और उन्हें नए बाजार मिल रहे हैं। इसके साथ ही, पारंपरिक खादी की बढ़ती लोकप्रियता से उन कुशल कारीगरों और शिल्पकारों को सीधा संबल मिल रहा है जो हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए हैं।

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक खेती और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने जैसी अभिनव पहलों पर भी विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने पंजाब के मालवा क्षेत्र में चल रहे ‘खेती विरासत मिशन’ का जिक्र किया, जहाँ ‘नव-त्रिन्जन’ पहल के तहत कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस अनूठी खेती में किसी भी रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं किया जाता है, और तो और यहाँ प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है, जिससे धागे और कपड़ों को रंगने के लिए अलग से हानिकारक केमिकल्स की जरूरत नहीं पड़ती। यह पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन ने मिलकर सूख रही ‘हेवल’ नदी को एक बार फिर से जीवित कर दिया है। वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर को बढ़ाने (ग्राउंडवाटर रिचार्ज) और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप आज न केवल हेवल नदी प्रवाहित हो रही है, बल्कि क्षेत्र के दर्जनों सूखे प्राकृतिक जल स्रोत भी फिर से बहाल हो गए हैं।

महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों की सफलता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पादों को बाजार में लाया जा रहा है। इन उत्पादों की पैकेजिंग पर आदिवासी कला की अनूठी छाप देखने को मिलती है, जिसे जापान के प्रतिष्ठित और अंतराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित ‘गुड डिज़ाइन अवार्ड’ से नवाजा गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमारी पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पाद जब आधुनिक प्रबंधन से जुड़ते हैं, तो वे वैश्विक पटल पर परचम लहराते हैं।

अंत में, आगामी दीपावली और छठ जैसे महापर्वों के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन में जगह-जगह स्वच्छता अभियान चलाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि हमारी छोटी-छोटी कोशिशें ही हमारे परिवेश को सुंदर और स्वस्थ बना सकती हैं। पीएम ने सभी से आग्रह किया कि वे अपने त्योहारों की खुशियों में स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों को जरूर शामिल करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ के इस राष्ट्रव्यापी अभियान को और अधिक मजबूत बनाएँ।

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