पटना: बिहार की राजनीति में आरजेडी की कमान को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने साफ किया है कि फिलहाल उनका ध्यान राजनीति से ज्यादा अपने माता-पिता की सेवा पर है। इंडिया टीवी से बातचीत में रोहिणी ने कहा कि वह अपने पिता की तबीयत और उनकी देखभाल के लिए बिहार आई हैं। उन्होंने आरजेडी की कमान संभालने की चर्चाओं को भी खारिज किया।
‘मैं पापा के लिए आई हूं’
रोहिणी आचार्य ने बताया कि काफी समय से बिहार आने का कार्यक्रम बन रहा था, लेकिन समय नहीं मिल पा रहा था। उन्होंने कहा कि उनके पिता लालू प्रसाद यादव पहले दिन से उन्हें आने के लिए कह रहे थे। जैसे ही उन्हें समय मिला, वह पटना आ गईं।
उन्होंने कहा कि वह अपने पिता की सेहत और उनकी देखभाल के लिए आई हैं। रोहिणी ने बताया कि वह सुबह की सैर से लेकर रात के खाने तक ज्यादातर समय अपने पिता के साथ ही रहती हैं।
RJD की कमान संभालने की चर्चा पर क्या बोलीं?
सोशल मीडिया पर आरजेडी की कमान संभालने की चर्चाओं को लेकर रोहिणी आचार्य ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं पापा के लिए आई हूं, लोग तो बोलने के लिए कुछ भी बोलते हैं।”
रोहिणी ने यह भी कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले जो बातें कही हैं, वह आज भी उन पर कायम हैं। उनकी पटना वापसी के बाद राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें जरूर तेज हुई हैं, लेकिन उन्होंने फिलहाल किसी राजनीतिक जिम्मेदारी की घोषणा नहीं की है।
राजनीति में आएंगी या नहीं?
जब रोहिणी से पूछा गया कि क्या वह भविष्य में सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगी, तो उन्होंने कहा कि अभी उनकी प्राथमिकता अपने माता-पिता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि आगे क्या होगा, यह वह अभी नहीं बता सकतीं, लेकिन फिलहाल वह क्या कर रही हैं, यह जरूर बता सकती हैं।
रोहिणी ने कहा कि माता-पिता की सेवा और उनकी सेहत से ज्यादा उनके लिए कोई प्राथमिकता नहीं है।
बिहार के विकास को लेकर भी कही बात
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को गलत नहीं बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी भारतीय दुनिया के किसी भी हिस्से में रहे, अपने देश और परिवार के लिए चिंतित रहता है। उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि बिहार विकास करे।
हालांकि, उन्होंने फिलहाल राजनीतिक टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि राजनीति पर बात करने का समय आएगा तो वह आराम से बात करेंगी। दिल्ली में चल रहे प्रदर्शन को लेकर उन्होंने अपना समर्थन भी जताया।
गौरतलब है कि रोहिणी के पटना लौटने के बाद से उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हुई है। इससे पहले उन्होंने अपने पिता के बुलावे पर बिहार लौटने की जानकारी देते हुए इसे एक बेटी के तौर पर अपना फर्ज बताया था। पटना पहुंचने के बाद भी उन्होंने मीडिया से अपनी यात्रा को राजनीतिक रंग नहीं देने की अपील की थी।