गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के AIIMS Gorakhpur में स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर दो दिवसीय ‘AI in Healthcare’ कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार से शुरू हुई इस कार्यशाला में चिकित्सा क्षेत्र में AI की संभावनाओं, उपयोग और इससे जुड़े जोखिमों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
कार्यक्रम में एम्स गोरखपुर की निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि AI कभी डॉक्टरों की जगह नहीं ले सकता। उनके मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा क्षेत्र में एक तकनीकी सहायक की भूमिका निभाएगा, जबकि मरीज के इलाज और निदान से जुड़ा अंतिम निर्णय डॉक्टर ही लेंगे।
IIT मुंबई के विशेषज्ञ दे रहे प्रशिक्षण
कार्यशाला में IIT मुंबई से आए विशेषज्ञ एम्स के फैकल्टी सदस्यों, डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को स्वास्थ्य सेवाओं में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दे रहे हैं। फिजियोलॉजी विभाग के डॉ. आशीष अरविंद के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को AI के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराना है, ताकि भविष्य में इस तकनीक का सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल किया जा सके।
रेडियोलॉजी से डेटा एनालिसिस तक AI की भूमिका
विशेषज्ञों के मुताबिक, AI बड़ी मात्रा में मेडिकल डेटा का तेजी से विश्लेषण करने में मदद कर सकता है। इसका इस्तेमाल इमेजिंग, एक्स-रे और रेडियोलॉजी जैसी जांचों में संभावित असामान्यताओं की पहचान के लिए किया जा सकता है।
AI डॉक्टरों का ध्यान उन रिपोर्ट्स या तस्वीरों के हिस्सों की ओर आकर्षित कर सकता है, जिनकी आगे जांच जरूरी हो। इसके अलावा जटिल मेडिकल डेटा को कम समय में प्रोसेस करने से चिकित्सकों का समय बच सकता है और वे मरीजों की देखभाल पर अधिक ध्यान दे सकते हैं।
मरीजों के डेटा की सुरक्षा पर भी जोर
कार्यशाला में AI के फायदों के साथ इससे जुड़े जोखिमों पर भी चर्चा की गई। खास तौर पर मेडिकल डेटा की सुरक्षा, मरीजों की प्राइवेसी, AI के परिणामों की विश्वसनीयता और जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि AI आधारित सिस्टम के इस्तेमाल में मानवीय निगरानी जरूरी है। तकनीक से मिलने वाले परिणामों को चिकित्सकीय विवेक और विशेषज्ञ की निगरानी के साथ ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
AI को लेकर आगे की तैयारी
एम्स गोरखपुर प्रशासन के अनुसार, आने वाले समय में चिकित्सा प्रक्रियाओं में AI के इस्तेमाल की दिशा में और कदम उठाए जा सकते हैं। इसके लिए डॉक्टरों और स्टाफ को तकनीकी प्रशिक्षण देने तथा विशेषज्ञों के साथ लगातार चर्चा करने की योजना है।
प्रशासन का कहना है कि AI को अपनाते समय मरीजों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे चिकित्सा सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों के हितों की सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा।