उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लगातार हो रही बारिश के बीच एक बड़ी लापरवाही और खौफनाक हादसा सामने आया है। शहर के व्यस्तम इलाकों में से एक आईटी चौराहे के पास मुख्य मार्ग पर अचानक सड़क धंस गई। सड़क धंसने के कारण वहां 10 फीट से भी ज्यादा गहरा गड्ढा बन गया।
अंधेरे और बारिश के कारण सड़क पर बने इस बड़े गड्ढे को बाइक सवार देख नहीं पाए और सीधे उसमें जा गिरे। इस भीषण हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। आइए जानते हैं कि यह पूरी घटना कहां और कैसे हुई।
सांसद दिनेश शर्मा के आवास के ठीक सामने हुआ हादसा
यह दर्दनाक हादसा आईटी क्रॉसिंग के पास उत्तर प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा के आवास के ठीक बगल में हुआ है। यह जगह लखनऊ यूनिवर्सिटी के पास और कृषि निदेशक दफ्तर के ठीक सामने मुख्य मार्ग पर स्थित है।
अति-सुरक्षित और वीआईपी इलाका होने के बावजूद मुख्य मार्ग पर 10 फीट गहरा गड्ढा होना नगर निगम और संबंधित रखरखाव एजेंसियों के दावों पर बड़े सवाल खड़े करता है। बारिश के कारण जलभराव होने से यह गड्ढा राहगीरों को दिखाई नहीं दिया।
बाइक सवार दो भाई गिरे गड्ढे में, एक हुआ बेहोश
हादसे का शिकार हुए युवकों में से एक की पहचान नितिन प्रजापति के रूप में हुई है। पीड़ित नितिन ने घटना की आपबीती बताते हुए कहा कि वे और उनके भाई बीती रात बाइक से अपने घर लौट रहे थे। बारिश की वजह से सड़क पर पानी भरा था और गड्ढा बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा था।
अचानक उनकी बाइक 10 फीट गहरे गड्ढे में समा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि उनका भाई मौके पर ही बेहोश हो गया। आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत दौड़कर उन्हें किसी तरह गड्ढे से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। घटना के लगभग 10-15 मिनट बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल नगर निगम ने आनन-फानन में मिट्टी डालकर गड्ढे को भर दिया है।
कानपुर के सरैया चौराहे पर भी धंसी थी 18 फीट सड़क
सड़क धंसने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले कानपुर के जाजमऊ स्थित सरैया चौराहे पर भी अचानक वीआईपी मार्ग की सड़क धंस गई थी। वहां लगभग 18 फीट गहरा और 3 मीटर चौड़ा विशालकाय गड्ढा हो गया था।
कानपुर की उस घटना के बाद पुलिस को सुरक्षा के लिहाज से हाईवे की एक लेन को बंद करना पड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि पहले बने छोटे गड्ढों को बिना किसी तकनीकी जांच के सिर्फ औपचारिकता के लिए भर दिया जाता है, जिससे बारिश आते ही जमीन अंदर से धंस जाती है और ऐसे हादसे होते हैं।