नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को GenZ के मुद्दे पर केंद्र सरकार को एक बार फिर घेरा। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है, उन्होंने हिंसा नहीं की थी, फिर भी उनके साथ लाठीचार्ज और धमकियों जैसा व्यवहार किया गया। राहुल गांधी ने युवाओं की हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों का सम्मान होना चाहिए।
राहुल गांधी ने साफ कहा कि प्रदर्शन करने वाले युवाओं ने कोई गलत काम नहीं किया। उनके अनुसार, छात्रों ने संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाई, लेकिन इसके बदले उन्हें डराने, धमकाने और पीटने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं ने मीडिया के सामने आकर हिम्मत दिखाई है।
उन्होंने यह दावा भी किया कि कुछ महिला प्रदर्शनकारियों के घरों में गुंडे भेजे गए और एक 15 साल की लड़की से जबरदस्ती माफी मंगवाई गई। राहुल गांधी ने इसे पूरी तरह बेतुका बताया और कहा कि ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था के बारे में शिकायत करना कोई अपराध नहीं है। उनके मुताबिक, अगर सिस्टम खराब है, ढह रहा है या काम नहीं कर रहा है, तो उसे बदलने की जरूरत है, न कि शिकायत करने वालों को दबाने की। उन्होंने कहा कि छात्र बस यही मांग कर रहे थे कि व्यवस्था सुधरे और परीक्षा प्रणाली पारदर्शी बने।
उन्होंने पेपर लीक की समस्या का भी जिक्र किया और कहा कि देश के भविष्य का सम्मान होना चाहिए। राहुल गांधी के अनुसार, जब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
GenZ प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश
राहुल गांधी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ GenZ युवा भी मौजूद थे, जिन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर और मुंबई में प्रदर्शन किया था। कांग्रेस नेता ने कहा कि इन युवाओं ने जो किया उस पर उन्हें गर्व है। उन्होंने इन प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रतीक बताया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में युवाओं, रोजगार, शिक्षा और परीक्षा प्रणाली को लेकर असंतोष पहले से चर्चा में है। राहुल गांधी का यह रुख विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखकर सरकार पर दबाव बनाना चाहता है।
राहुल गांधी के आरोपों ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके अनुसार, हिंसा का सहारा लेने के बजाय छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अगर युवा व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं, तो उन पर दमन उचित नहीं है।
राजनीतिक रूप से भी यह बयान अहम है क्योंकि यह कांग्रेस को युवाओं के समर्थक के रूप में पेश करता है। साथ ही, यह शिक्षा और परीक्षा सुधार जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बनाता है।