नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन मंगलवार को एक बार फिर शुरू हो गया। सोमवार को हुए भारी हंगामे और पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर को खाली करा दिया गया था, लेकिन देर रात से प्रदर्शनकारी दोबारा वहां जुटने लगे। स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है तथा संसद भवन की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को रोका नहीं जाएगा, लेकिन कानून-व्यवस्था भंग करने, हिंसा या किसी भी तरह के उपद्रव की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को आशंका है कि प्रदर्शनकारी एक बार फिर संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश कर सकते हैं, इसलिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।
प्रदर्शन के बीच नेताओं और सरकार के बीच बातचीत की संभावना की चर्चा भी सामने आई। हालांकि प्रदर्शनकारियों की ओर से अभिजीत दीपके ने कहा कि अब किसी भी तरह की बातचीत जंतर-मंतर पर ही होगी। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर यहीं संवाद किया जाए और समाधान निकाला जाए।
गौरतलब है कि सोमवार को प्रदर्शन के दौरान हालात हिंसक हो गए थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस अब घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा रही है।
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन जारी रखने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि जब तक युवा नेताओं को संसद भवन में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं मिलती या अस्पताल में उनसे मुलाकात की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि छात्रों और युवाओं को अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अवसर दिया जाए, ताकि मौजूदा तनाव को कम किया जा सके।
फिलहाल जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सख्त है। पुलिस हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, जबकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।