भारतीय रेल ने माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और परिचालन को अधिक सुचारु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दक्षिण पूर्वी रेलवे के अंतर्गत बोंडामुंडा ‘ए’ केबिन से बोंडामुंडा लिंक ‘बी’ केबिन तक 4.59 किलोमीटर लंबे रेल फ्लाईओवर के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना पर 135 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसका उद्देश्य राउरकेला–बोंडामुंडा रेलखंड पर बढ़ते रेल यातायात के दबाव को कम करना और मालगाड़ियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है।
यह रेलखंड देश के प्रमुख औद्योगिक गलियारों में शामिल है, जहां खनन और इस्पात उद्योग की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस फ्लाईओवर परियोजना को अहम माना जा रहा है।
औद्योगिक विकास के अनुरूप बढ़ाई जाएगी क्षमता
भारतीय रेल के अनुसार, एसएआईएल के बारसुआ-ताल्डीह-काल्टा खनन परिसर के विस्तार, राउरकेला स्टील प्लांट में उत्पादन बढ़ने और उच्च-घनत्व नेटवर्क (HDN) मार्ग के दोहरीकरण की योजना के कारण इस सेक्शन में माल ढुलाई यातायात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
इसी को ध्यान में रखते हुए रेल फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा, जिससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन को अलग-अलग किया जा सकेगा। इससे ट्रेनों के क्रॉसिंग संबंधी अवरोध कम होंगे और परिचालन अधिक सुरक्षित एवं तेज होगा।
बोंडामुंडा यार्ड में घटेगी भीड़
नई परियोजना के पूरा होने के बाद भारी मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों से अलग मार्ग मिलेगा। इससे बोंडामुंडा यार्ड में होने वाली भीड़भाड़ काफी कम होगी और ट्रेनों की समयबद्ध आवाजाही सुनिश्चित की जा सकेगी।
रेल अधिकारियों का मानना है कि इससे लाइन क्षमता, परिचालन दक्षता, नेटवर्क की विश्वसनीयता और समग्र रेल प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले खनिज और इस्पात उत्पादों के परिवहन में भी तेजी आएगी।
हर साल 8 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता
परियोजना के चालू होने के बाद भारतीय रेल को प्रति वर्ष लगभग 8 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई (MTPA) संभालने में मदद मिलेगी। इससे खनिज, इस्पात और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।
यह परियोजना भारतीय रेल के ऊर्जा, खनिज एवं सीमेंट कॉरिडोर के तहत विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य देशभर में रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स लागत कम करना और औद्योगिक विकास को गति देना है। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना भविष्य की बढ़ती माल ढुलाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।