सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी ₹6,800 टूटी तो सोना ₹1,600 लुढ़का

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नई दिल्ली। घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार को सोना और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। सबसे बड़ी गिरावट चांदी में देखने को मिली, जहां कीमतों में करीब ₹6,800 प्रति किलोग्राम की कमी दर्ज की गई। वहीं सोना भी लगभग ₹1,600 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया।

बाजार आंकड़ों के अनुसार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना करीब ₹1,46,566 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि चांदी का भाव घटकर लगभग ₹2,27,622 प्रति किलोग्राम रह गया। सर्राफा बाजार में भी इसका असर देखने को मिला और विभिन्न शहरों में सोने के खुदरा भाव में कमी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। डॉलर इंडेक्स के 101 के आसपास पहुंचने से वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की मांग प्रभावित हुई है। चूंकि सोना और चांदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में कारोबार किए जाते हैं, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर इन धातुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।

इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे बुलियन बाजार पर दबाव पड़ता है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि गोल्ड ETF से लगातार निकासी भी कीमतों में गिरावट का एक प्रमुख कारण है। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और पूंजी निकासी के चलते बाजार में बिकवाली बढ़ी है। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन इसका सकारात्मक असर सोने की मांग पर देखने को नहीं मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन और स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

ज्वैलरी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे कुछ दिनों तक बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखें। यदि गिरावट का सिलसिला जारी रहता है तो उन्हें और बेहतर कीमत पर खरीदारी का मौका मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

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