मॉस्को। रूस की राजधानी मॉस्को के कई इलाकों में उस समय हड़कंप मच गया जब लोगों ने आसमान से काले और तैलीय कणों जैसी बारिश होने की शिकायत की। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो में कारों, सड़कों, इमारतों और खिड़कियों पर चिपचिपी काली परत जमी हुई दिखाई दी। इस असामान्य घटना ने स्थानीय निवासियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब यूक्रेन ने रूस की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया। रिपोर्टों के अनुसार करीब 200 ड्रोन के जरिए किए गए इस हमले के बाद रिफाइनरी क्षेत्र में भीषण आग लग गई और आसमान में घना धुआं तथा मलबा फैल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी धुएं और रासायनिक कणों के कारण मॉस्को के कुछ हिस्सों में ‘काली बारिश’ जैसी स्थिति पैदा हुई।
स्थानीय प्रशासन ने शुरुआत में घटना को सामान्य बताने की कोशिश की, लेकिन बाद में स्वास्थ्य विभाग और क्षेत्रीय अधिकारियों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की। लोगों से घरों की खिड़कियां बंद रखने, अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और संवेदनशील वर्गों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार रिफाइनरी में हुए विस्फोट से तेल, ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के सूक्ष्म कण वातावरण में फैल गए होंगे। बारिश के साथ ये कण जमीन पर गिरकर काले धब्बों और तैलीय परत के रूप में दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा धुएं में मौजूद सल्फर यौगिक और अन्य रासायनिक तत्व भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे कण सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। त्वचा और आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में परेशानी और एलर्जी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। नागरिकों को मास्क पहनने, दूषित सतहों को छूने से बचने और प्रभावित पदार्थ के संपर्क में आने पर तुरंत साबुन-पानी से सफाई करने की सलाह दी गई है।
इस घटना ने पर्यावरणीय सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें सरकारी जांच और लैब परीक्षणों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिनसे यह स्पष्ट हो सकेगा कि काली बारिश में मौजूद पदार्थ वास्तव में क्या थे और उनका मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ सकता है।