भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 1 जून 2026 से लागू हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी घोषणा की। इस समझौते के लागू होने से भारत और ओमान के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी और भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
इस समझौते के तहत भारत को ओमान की 98 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों पर पूरी तरह शुल्क-मुक्त (टैरिफ-फ्री) पहुंच मिलेगी। इसका मतलब है कि भारत से ओमान भेजे जाने वाले कई उत्पादों पर अब आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पाद कम कीमत पर बेचने का मौका मिलेगा और उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।
इस समझौते का सबसे ज्यादा फायदा कपड़ा उद्योग, कृषि उत्पाद, प्रोसेस्ड फूड, रत्न एवं आभूषण, ऑटोमोबाइल पार्ट्स और प्रीसिजन उपकरण बनाने वाले क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों के निर्यात में आने वाले समय में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
समझौते के लागू होने के पहले ही दिन मुंबई, चेन्नई और कोलकाता से कृषि उत्पादों और रत्न-आभूषणों की कई खेपें ओमान के लिए रवाना की गईं। यह दोनों देशों के बढ़ते व्यापारिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है।
भारत और ओमान ने इस समझौते पर दिसंबर 2025 में मस्कट में हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों द्वारा जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इसे अब आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है।
ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। वहां के आधुनिक बंदरगाह भारतीय कारोबारियों को पूरे खाड़ी क्षेत्र (GCC) के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ओमान के बीच कुल व्यापार 11 अरब डॉलर से अधिक रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए समझौते के बाद यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। हालांकि व्यापार बढ़ाने के लिए गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और बेहतर लॉजिस्टिक्स जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।
सरकार को उम्मीद है कि यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाएगा।