मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान बिना शर्त सरेंडर नहीं करता, तब तक अमेरिका की ओर से किसी भी तरह की बातचीत की संभावना नहीं है। ट्रंप ने ईरान को “पश्चिम एशिया का लूजर” बताते हुए कहा कि मौजूदा हालात और गंभीर हो सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संघर्ष के शुरू होने से पहले ट्रंप के कुछ करीबी सहयोगियों ने उन्हें सैन्य कार्रवाई से बचने की सलाह दी थी। इनमें उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, जब ट्रंप ने पहली बार ईरान के खिलाफ युद्ध की संभावना जताई थी, तब जेडी वेंस ने उन्हें सावधान किया था। उन्होंने मिडिल ईस्ट में नए युद्ध के खतरे और उसके संभावित परिणामों पर चिंता जताई थी।
हालांकि जब यह साफ हो गया कि ट्रंप सैन्य कार्रवाई के फैसले पर अडिग हैं, तब वेंस ने अपना रुख बदल लिया। बाद में उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए जरूरी था और इससे ईरान को पहले हमला करने से रोका जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के बीच भी इस युद्ध को लेकर मतभेद थे। ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने संभावित हमले के नकारात्मक प्रभावों को लेकर चेतावनी दी थी।
वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी शुरुआती दौर में ट्रंप को इस युद्ध के लिए पूरा समर्थन नहीं दिया था। उनका मानना था कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ सकती है।
हालांकि जब युद्ध शुरू हो गया और ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया, तब धीरे-धीरे अमेरिकी प्रशासन के कई शीर्ष अधिकारियों ने विरोध कम कर दिया।
हाल ही में फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जेडी वेंस ने कहा कि ट्रंप अमेरिका को किसी ऐसे युद्ध में नहीं झोंकेंगे जिसका कोई स्पष्ट उद्देश्य न हो। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मिडिल ईस्ट में चल रहा यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रह सकता है।