तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। इसी बीच अभिनेता से राजनेता बने विजय ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) का घोषणापत्र जारी कर राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है। पहली बार चुनावी मैदान में उतरी इस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं और युवाओं पर विशेष फोकस करते हुए कई बड़े और आकर्षक वादे किए हैं।
घोषणापत्र के मुताबिक, 60 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है। इसके साथ ही हर परिवार को सालाना 6 मुफ्त गैस सिलेंडर देने की घोषणा की गई है। सबसे ज्यादा चर्चा जिस वादे को लेकर हो रही है, वह है गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और क्वालिटी सिल्क साड़ी देने का वादा। इस घोषणा को सीधे तौर पर महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र पारंपरिक पार्टियों के मुकाबले एक आक्रामक और जन-हितैषी छवि बनाने की कोशिश है। खासकर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देने का वादा, मौजूदा राजनीतिक माहौल में बड़ा चुनावी हथियार बन सकता है।
विजय की पार्टी ने युवाओं को भी अपने घोषणापत्र में प्रमुखता दी है। ग्रेजुएट युवाओं को ₹4,000 और डिप्लोमा धारकों को ₹2,000 मासिक भत्ता देने का वादा किया गया है। इसके अलावा, निजी कंपनियों में 75% नौकरियां स्थानीय लोगों को देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह कदम युवाओं में रोजगार को लेकर बढ़ती चिंता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
इसके अलावा घोषणापत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ब्याज मुक्त लोन, सरकारी क्षेत्रों में इंटर्नशिप और कौशल विकास कार्यक्रमों का भी जिक्र किया गया है। यह साफ है कि पार्टी युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है।
इस बार का चुनाव तमिलगा वेट्टी कड़गम के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यह उसका पहला चुनाव है और पार्टी 234 की 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। विजय खुद दो सीटों—पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट—से मैदान में हैं।
टिकट वितरण में भी पार्टी ने महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए 24 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को केवल घोषणापत्र तक सीमित नहीं रखना चाहती।
हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इतने बड़े वादों को लागू करना आर्थिक रूप से संभव होगा? विपक्षी दल इन घोषणाओं को “लोकलुभावन” बता रहे हैं और इसे चुनावी स्टंट करार दे रहे हैं।
फिर भी, यह तय है कि इस घोषणापत्र ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में यह चुनावी बहस का केंद्र बना रहेगा।