सुरों की अमर आवाज़ हुई खामोश: आशा भोसले के निधन पर देशभर में शोक की लहर

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भारतीय संगीत जगत को एक गहरा आघात लगा है। सुरों की जादूगर और करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले के निधन की खबर ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। उनके जाने से न केवल संगीत की दुनिया में एक खालीपन आया है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी अपूरणीय क्षति पहुंची है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आशा जी की आवाज़ में एक अनोखी चमक थी, जिसने दशकों तक लोगों के दिलों को छुआ। उन्होंने उनकी संगीत यात्रा को भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा बताया।

वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि आशा ताई ने अपनी प्रतिभा से भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके गीत आज भी हर पीढ़ी के दिलों में बसे हुए हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे “संगीत जगत के दूसरे तारे का अस्त होना” बताया। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर के बाद अब आशा भोसले का जाना एक युग के अंत जैसा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 90 साल की उम्र में भी आशा जी ने मंच पर 3 घंटे तक प्रस्तुति देकर दुनिया को चौंका दिया था।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संदेश में कहा कि आशा जी ने 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गीत गाकर संगीत को एक नई ऊंचाई दी। उनकी आवाज़ में गाए गए गीत जैसे “उमराव जान”, “तीसरी मंज़िल” और “रंगीला” आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे कला जगत की अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उनकी मधुर धुनें हमेशा लोगों के दिलों में गूंजती रहेंगी। वहीं ममता बनर्जी ने उन्हें पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि आशा भोसले की आवाज़ हमेशा अमर रहेगी और उनके गीत ही उनका सच्चा स्मारक होंगे।

करीब 12000 से ज्यादा गानों और कई दशकों के लंबे करियर में आशा भोसले ने शास्त्रीय, पॉप, ग़ज़ल, फिल्मी और लोक संगीत—हर शैली में अपनी पहचान बनाई। उनकी आवाज़ ने समय के साथ खुद को बदला, लेकिन उनकी मिठास और ऊर्जा हमेशा बरकरार रही।

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