भारतीय संस्कृति में शादी सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि एक पवित्र बंधन होता है, जिसकी शुरुआत शुभ समय से करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए ज्यादातर परिवार विवाह की तारीख तय करने से पहले खरमास और अन्य ज्योतिषीय पहलुओं का विशेष ध्यान रखते हैं।
खरमास के दौरान सूर्य मीन राशि में होता है, और इस समय को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। यही वजह है कि 14 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक विवाह जैसे कार्यक्रमों पर विराम रहता है। लेकिन इसके बाद शुभ मुहूर्तों की शुरुआत हो जाती है।
शादी की तारीख तय करते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि परिवार की सुविधा, मौसम, बजट और स्थान का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। कई बार लोग सिर्फ शुभ मुहूर्त देखकर तारीख तय कर लेते हैं, लेकिन बाद में व्यवस्थाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा, आजकल डेस्टिनेशन वेडिंग और बड़े आयोजन का ट्रेंड बढ़ गया है, ऐसे में पहले से प्लानिंग करना और बुकिंग कराना बहुत जरूरी हो गया है। शुभ मुहूर्त के दौरान वेन्यू और सर्विसेज की डिमांड भी ज्यादा होती है।
इसलिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप पहले संभावित मुहूर्तों की लिस्ट तैयार करें और फिर उनमें से अपनी सुविधा के अनुसार तारीख चुनें।
अंत में, याद रखें कि शादी का असली उद्देश्य खुशहाल जीवन की शुरुआत है, इसलिए मुहूर्त के साथ-साथ आपसी समझ और तैयारी भी उतनी ही जरूरी है।