कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने Lucknow में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru अगर आज जीवित होते, तो बहुजन नेता Kanshi Ram को कांग्रेस के भीतर ही नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी मिलती।
उन्होंने कहा कि कांशीराम ने 1978 में BAMCEF की स्थापना की थी और बाद में 1984 में Bahujan Samaj Party का गठन किया। यह उस दौर की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का परिणाम था।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस ने उस समय सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अधिक मजबूती से काम किया होता, तो शायद कांशीराम को अलग राजनीतिक मंच बनाना नहीं पड़ता।
अपने भाषण में उन्होंने Mahatma Gandhi, B. R. Ambedkar और कांशीराम को ऐसे नेता बताया जिन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
राहुल गांधी ने कहा कि आज देश को उसी विचारधारा की जरूरत है, जिसमें समानता, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने केंद्र सरकार की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आज बाहरी ताकतें यह तय कर रही हैं कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा।
उन्होंने कहा कि वह संसद में इस मुद्दे को उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं मिला।
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।