उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन और संपत्ति से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। Yogi Adityanath की अगुवाई में हुई कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि अब प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान राजस्व रिकॉर्ड से किया जाएगा।
नए नियम के तहत जब कोई व्यक्ति जमीन बेचने के लिए स्टांप पेपर लेना चाहेगा तो सबसे पहले यह देखा जाएगा कि वह उस संपत्ति का वास्तविक मालिक है या नहीं। इसके लिए विक्रेता का नाम खतौनी में दर्ज होना जरूरी होगा। यदि रिकॉर्ड में नाम नहीं मिलता है तो स्टांप जारी नहीं किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से जमीन हड़पने और फर्जी रजिस्ट्री जैसे मामलों में कमी आएगी। कई बार देखा गया है कि जालसाज किसी दूसरे की जमीन को अपना बताकर बेच देते हैं। अब इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।
इसी बैठक में “सीएम ग्राम परिवहन योजना” को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत राज्य की 59 हजार से अधिक ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ा जाएगा। परिवहन मंत्री Dayashankar Singh के मुताबिक सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।
योजना लागू होने के बाद गांवों से ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचना आसान होगा। इससे छात्रों, मरीजों और कामकाजी लोगों को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों पर भी नियंत्रण बढ़ाने का फैसला किया है। अब Uber और Ola Cabs जैसी कंपनियों को राज्य में संचालन के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
इसके अलावा कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों के लिए पारदर्शिता से जुड़े नियम भी तय किए गए। अब कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा और बड़े निवेश की जानकारी सरकार को देनी होगी।