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पर्सनल लोन को पीछे छोड़ रहा गोल्ड लोन, बदलती आर्थिक जरूरतों की नई तस्वीर
देश में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग सोना बेचने के बजाय उसे गिरवी रखकर कर्ज लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 में गोल्ड लोन का आंकड़ा ₹24,061 करोड़ तक पहुंच गया, जो इस सेक्टर में तेज विस्तार का संकेत देता है।
आंकड़े बताते हैं कि गोल्ड लोन अब केवल ग्रामीण या पारंपरिक विकल्प नहीं रहा, बल्कि शहरी मध्यम वर्ग भी तेजी से इसे अपना रहा है। दिसंबर 2025 तक कुल गोल्ड लोन बकाया ₹3.82 लाख करोड़ पहुंच चुका है, जो पिछले साल की तुलना में भारी बढ़ोतरी दर्शाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, गोल्ड लोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज स्वीकृति प्रक्रिया है। बैंक और एनबीएफसी केवल सोने की शुद्धता जांचकर लोन जारी कर देते हैं, जिससे आपात स्थिति में तुरंत पैसे मिल जाते हैं। यही कारण है कि यह विकल्प अब इमरजेंसी फंड जैसा बनता जा रहा है।
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दिलचस्प बात यह है कि कुल उपभोग ऋण में गोल्ड लोन का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है और यह पर्सनल लोन के बराबर पहुंचने लगा है। हालांकि, होम लोन अभी भी सबसे बड़ा कर्ज क्षेत्र बना हुआ है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन का बढ़ता उपयोग दो संकेत देता है—एक तरफ वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच, तो दूसरी तरफ परिवारों पर बढ़ता खर्च और आर्थिक दबाव। यदि यह रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में गोल्ड लोन भारत के उपभोग वित्त का प्रमुख हिस्सा बन सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या यह बढ़ोतरी आर्थिक मजबूती का संकेत है या बढ़ते वित्तीय तनाव का परिणाम—इसका जवाब आने वाले महीनों में साफ होगा |