राजपाल यादव से जुड़ा चेक बाउंस मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। 2012 में रिलीज हुई फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए लिए गए कर्ज को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी पेचीदगियों में उलझ चुका है। हाल ही में अभिनेता को जेल जाना पड़ा, हालांकि उन्हें बाद में अंतरिम जमानत मिल गई।
वकील के अनुसार, फिल्म के प्रमोशनल इवेंट के दौरान घटनाक्रम बदला। म्यूजिक लॉन्च कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम में कथित तौर पर मंच साझा करने को लेकर असहमति हुई, जिसके बाद कारोबारी और अभिनेता के बीच संबंध बिगड़ गए।
कहा जा रहा है कि प्रारंभिक समझौते के तहत कई चेक जारी किए गए थे, जिन्हें बाद में आपसी सहमति से रद्द किया गया। लेकिन बाद की कानूनी कार्यवाही में उन्हीं दस्तावेजों को आधार बनाकर केस आगे बढ़ाया गया। 2018 में निचली अदालत ने अभिनेता को दोषी ठहराया और आर्थिक दंड लगाया।
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राजपाल यादव की कानूनी टीम का दावा है कि मामला समझौतों की व्याख्या और भुगतान शर्तों के मतभेद का परिणाम है। उन्होंने अदालत से समय देने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया है।
फिलहाल उच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है। इस पूरे प्रकरण में अमिताभ बच्चन का नाम केवल उस कार्यक्रम के संदर्भ में सामने आया, जहां से विवाद की शुरुआत बताई जा रही है।
मामले का अंतिम निर्णय अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा, लेकिन इसने एक बार फिर फिल्मी दुनिया में वित्तीय समझौतों की जटिलताओं को उजागर कर दिया है।