ध्रुवीकरण बनाम विकास की राजनीति: असम में प्रियंका गांधी का सीधा संदेश

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असम की राजनीति इन दिनों चुनावी रंग में रंगी हुई है। इसी माहौल में प्रियंका गांधी वाड्रा का गुवाहाटी दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में साफ संकेत दिया कि उनकी पार्टी मुद्दों की राजनीति में विश्वास रखती है, न कि व्यक्तिगत या भावनात्मक ध्रुवीकरण में।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव होना चाहिए। उनके अनुसार, जनता को यह बताना ज्यादा जरूरी है कि सरकार उनके लिए क्या करना चाहती है, बजाय इसके कि समाज को बांटकर वोट हासिल करने की कोशिश की जाए।

अपने संबोधन में उन्होंने असम के प्रसिद्ध कलाकार ज़ुबीन गर्ग को याद किया। प्रियंका गांधी ने कहा कि ज़ुबीन गर्ग असम की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक थे। उनके गीतों में जो एकता और प्रेम का संदेश था, वही असम की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान कलाकारों की विरासत को राजनीति से दूर रखना चाहिए।

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इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और उनके परिवार पर हो रहे हमलों को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। प्रियंका गांधी ने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमले लोकतंत्र को कमजोर करते हैं।

उनका संदेश साफ था—असम की जनता विकास, संस्कृति और सामाजिक सद्भाव की राजनीति चाहती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की प्राथमिकता राज्य की सभ्यता, भाषा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना है।

गुवाहाटी में दिया गया यह बयान न केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आने वाले दिनों में असम की राजनीति मुद्दों और विचारधाराओं की बहस के इर्द-गिर्द घूमेगी।

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