फतेहपुर जिले के एक छोटे से गांव बरमतपुर में घटी घटना ने रिश्तों को झकझोर कर रख दिया है। एक बेटे ने शराब के लिए पैसे न मिलने पर अपनी मां को बेरहमी से पीटकर मार डाला। यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़े गंभीर सवालों की कहानी भी है।
माया देवी, जो अपने परिवार की धुरी थीं, अपने ही बेटे के गुस्से और नशे का शिकार बन गईं। बताया जा रहा है कि उनका बड़ा बेटा अरविंद लंबे समय से शराब का आदी था। वह अक्सर अपनी मां से पैसे मांगता और मना करने पर विवाद करता था। घटना वाले दिन भी यही हुआ, लेकिन इस बार विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
गुस्से और नशे में धुत बेटे ने लोहे की रॉड से अपनी मां पर हमला कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि वारदात के बाद वह वहीं बैठा रहा और मां को तड़पते देखता रहा। पड़ोसियों की सतर्कता से महिला को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि शराब की लत के दुष्परिणामों की भयावह तस्वीर भी है। नशा न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार को तबाह कर देता है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति परिवारों में हिंसा को जन्म दे रही है।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या समय रहते नशे की लत पर रोक लगाई जा सकती थी? क्या परिवार या समाज स्तर पर कोई हस्तक्षेप संभव था?
फतेहपुर की यह घटना एक चेतावनी है कि नशा केवल आदत नहीं, बल्कि विनाश की ओर ले जाने वाला रास्ता है।