नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में कपूर परिवार की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों की टूटन की तस्वीर बनता जा रहा है। दिवंगत कारोबारी संजय कपूर की संपत्ति को लेकर उनकी मां रानी कपूर, तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और पूर्व पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चे आमने-सामने हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मध्यस्थता को सबसे बेहतर विकल्प बताया है।
वसीयत बनी विवाद की वजह
प्रिया सचदेव कपूर का दावा है कि संजय कपूर ने अपनी मृत्यु से पहले 2025 में एक वसीयत बनाई थी, जिसमें उन्होंने अपनी पूरी निजी संपत्ति प्रिया के नाम कर दी थी। प्रिया के अनुसार, यह वसीयत पूरी तरह वैध और कानूनी है।
लेकिन रानी कपूर और करिश्मा कपूर ने इस दावे को चुनौती दी है। उनका कहना है कि वसीयत संदिग्ध है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। रानी कपूर ने तो RK ट्रस्ट को ही अवैध बताते हुए अदालत से इसके रद्द किए जाने की मांग कर दी है।
अंतरिम डिविडेंड पर भी विवाद
इस केस में एक बड़ा मुद्दा लगभग 28 करोड़ रुपये के अंतरिम डिविडेंड को लेकर भी है। रानी कपूर चाहती हैं कि यह रकम प्रिया कपूर को न दी जाए, जबकि प्रिया कपूर ने इस याचिका को खारिज करने की मांग की है। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
अदालत की मानवीय सोच
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने कहा कि अदालत यह महसूस कर रही है कि इस विवाद से परिवार के सभी सदस्य मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतनी संपत्ति होने के बावजूद यदि परिवार शांति से नहीं रह पा रहा, तो यह स्थिति बेहद दुखद है।
अदालत ने दो टूक कहा कि इस तरह के मामलों में लंबी कानूनी लड़ाई परिवार को और तोड़ सकती है, इसलिए आपसी बातचीत और मध्यस्थता ही बेहतर समाधान है।
मध्यस्थता पर जोर
कोर्ट ने सभी वकीलों को निर्देश दिया कि वे अपने मुवक्किलों से मध्यस्थता के विकल्प पर गंभीरता से विचार करें। अदालत ने यह भी कहा कि प्रिया कपूर और उनके बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
23 मार्च को अगली सुनवाई
इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। अब 23 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि क्या कपूर परिवार अदालत के बाहर समझौते के रास्ते पर आगे बढ़ेगा या यह कानूनी जंग और लंबी खिंचेगी।