आधे विमानों में बार-बार खराबी, एयर इंडिया के 72% प्लेन फेल

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भारत का तेजी से बढ़ता विमानन क्षेत्र अब एक गंभीर सुरक्षा बहस के केंद्र में आ गया है। संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि देश की प्रमुख एयरलाइनों के करीब 50 फीसदी विमान बार-बार तकनीकी खराबियों का शिकार हो रहे हैं। यह जानकारी लोकसभा में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से दी गई, जिसने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

सरकार के अनुसार, जनवरी 2024 से अब तक 754 विमानों की विस्तृत तकनीकी जांच की गई, जिसमें से 377 विमानों में बार-बार खराबी दर्ज की गई। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि विमानन कंपनियों की मेंटेनेंस व्यवस्था पर सख्त निगरानी की जरूरत है।

एयर इंडिया सबसे ज्यादा संकट में

आंकड़ों के मुताबिक, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की स्थिति सबसे ज्यादा खराब पाई गई। कुल जांच किए गए विमानों में से 72 फीसदी एयर इंडिया के विमान बार-बार तकनीकी गड़बड़ी का सामना कर रहे हैं। एयर इंडिया के 166 विमानों में से 137 और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 101 विमानों में से 54 विमानों में तकनीकी समस्याएं दर्ज की गईं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि एयर इंडिया के बेड़े में पुराने विमानों की संख्या ज्यादा होने और एक साथ बड़े पैमाने पर संचालन के कारण दबाव बढ़ा है।

इंडिगो: सबसे बड़ा बेड़ा, सबसे ज्यादा रिपोर्टेड खामियां

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के 405 विमानों की जांच में 148 विमानों में बार-बार खराबी पाई गई। हालांकि इंडिगो का कहना है कि उसका बेड़ा अपेक्षाकृत नया है, लेकिन बड़ी संख्या में तकनीकी रिपोर्ट सामने आना यह दिखाता है कि निगरानी अब पहले से ज्यादा सख्त हो चुकी है।

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कम बजट एयरलाइनों की भी मुश्किलें

स्पाइसजेट और अकासा एयर भी इस सूची से अछूती नहीं रहीं। स्पाइसजेट के 43 विमानों में से 16 और अकासा एयर के 32 विमानों में से 14 विमानों में तकनीकी समस्याएं दर्ज की गईं।

DGCA की सख्ती और बढ़ती जांच

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री ने बताया कि DGCA ने पिछले वर्ष रिकॉर्ड संख्या में निरीक्षण किए। इसमें हजारों निगरानी निरीक्षण, दर्जनों ऑडिट और सैकड़ों रैंप व नाइट चेक शामिल हैं। इसके साथ ही DGCA में तकनीकी पदों की संख्या भी बढ़ाई गई है, ताकि निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

सवाल अब भी कायम

हालांकि एयरलाइनों का कहना है कि अधिकतर खराबियां गैर-सुरक्षा श्रेणी की हैं, लेकिन यात्रियों के मन में डर बना हुआ है। बार-बार फ्लाइट कैंसिलेशन, देरी और तकनीकी कारणों से उड़ानों का रद्द होना अब आम होता जा रहा है।

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