मुंबई: राजनीति के मजबूत चेहरे और एनसीपी अध्यक्ष रहे अजित पवार अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी यादें और विरासत हर किसी के दिल में जिंदा हैं। बारामती में हुए विमान हादसे के बाद अजित पवार के बेटे जय पवार ने सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता के लिए जो भावनाएं व्यक्त कीं, उसने पूरे राज्य को भावुक कर दिया।
जय पवार ने पिता के साथ की कुछ निजी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि काश समय को थाम लिया जाता। उनके शब्दों में बेटे का दर्द साफ झलकता है। जय का यह पोस्ट न केवल एक बेटे की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सख्त राजनीतिक छवि के पीछे अजित पवार एक संवेदनशील पिता भी थे।
जय पवार भले ही राजनीति के फ्रंटफुट पर नजर न आते हों, लेकिन वे एनसीपी के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं। चुनावी दौर में उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार किया और संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। बारामती के स्थानीय नागरिकों और पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, जय हमेशा लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं।
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28 जनवरी को हुआ विमान हादसा महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ। रनवे पर लैंडिंग के दौरान विमान के क्रैश होने से अजित पवार समेत चार अन्य लोगों की जान चली गई। हादसे की खबर फैलते ही समर्थकों और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई।
29 जनवरी को विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में हुए अंतिम संस्कार के दौरान जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर वर्ग के लोग अपने प्रिय नेता को आखिरी विदाई देने पहुंचे। यह दृश्य अजित पवार की लोकप्रियता और उनके प्रभाव को दर्शाता है।
राजनीतिक जिम्मेदारियों की बात करें तो अजित पवार के निधन के बाद पार्टी और सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया। उन्हें आबकारी, खेल और अल्पसंख्यक विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। सोमवार को उन्होंने कराड में यशवंतराव चव्हाण के स्मारक पर श्रद्धांजलि दी और मंगलवार को वे काटेवाडी स्थित अपने निवास पर शोक संवेदना स्वीकार करेंगी।
अजित पवार की कमी राजनीति में शायद कभी पूरी न हो सके, लेकिन उनके परिवार और समर्थकों की आंखों में आज भी वही सवाल है—काश वह हादसा न हुआ होता।