सोने और चांदी की कीमतों में बीते कुछ दिनों में असाधारण उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। लंबी रैली के बाद जहां कीमती धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर छुए, वहीं अचानक आई तेज गिरावट ने बाजार को हिला दिया। अब ऐतिहासिक गिरावट के बाद कीमतों में जोरदार रिकवरी देखने को मिल रही है।
कुछ समय पहले तक सोना 5,594.82 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ब्याज दरों को लेकर अटकलें और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग प्रमुख कारण रहे। हालांकि, इस ऊंचाई के बाद मुनाफावसूली का दौर शुरू हुआ और कीमतें तेजी से नीचे आने लगीं। सोना गिरते-गिरते करीब 4,700 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, यानी लगभग 900 डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
चांदी में यह गिरावट और भी ज्यादा तीखी रही। एक ही सत्र में चांदी के भाव 27 प्रतिशत तक टूट गए थे, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई। पिछले कुछ सत्रों में चांदी कुल मिलाकर 34 प्रतिशत तक लुढ़क गई थी।
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विशेषज्ञों के मुताबिक गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वॉर्श को अगले फेडरल रिजर्व चेयर के रूप में नामित करने की खबर ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके अलावा CME ग्रुप द्वारा कीमती धातुओं के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर मार्जिन आवश्यकताओं को बढ़ाने के फैसले ने भी बिकवाली को तेज कर दिया।
अब जब कीमतें काफी नीचे आ चुकी थीं, तो निवेशकों ने इसे खरीदारी का मौका माना। नतीजतन सोने और चांदी में जोरदार उछाल देखने को मिला। बाजार जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्कता के साथ रणनीति बनानी चाहिए।