रानी मुखर्जी आज हिंदी सिनेमा का वो नाम हैं, जिनकी दमदार अदाकारी और खास आवाज दोनों ही उनकी पहचान बन चुकी हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था जब फिल्मों में रानी नजर तो आती थीं, लेकिन उनकी आवाज सुनाई नहीं देती थी। ‘मर्दानी 3’ की रिलीज से पहले इंडिया टीवी को दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रानी ने इस अनसुनी सच्चाई से पर्दा उठाया।
अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए रानी बताती हैं कि इंडस्ट्री में नई होने की वजह से उन पर पूरा भरोसा नहीं किया जाता था। कई मेकर्स को लगता था कि उनकी आवाज दर्शकों को पसंद नहीं आएगी। इसी वजह से कुछ फिल्मों में उनकी आवाज किसी और से डब करवाई गई।
रानी का मानना है कि उस दौर में उन्होंने कभी खुद को पीड़ित नहीं माना। उन्होंने इसे सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा समझा। उनके अनुसार, सिनेमा सिर्फ स्टारडम नहीं बल्कि सामूहिक मेहनत का नतीजा होता है, जहां कभी-कभी व्यक्तिगत पसंद से ऊपर फिल्म का हित होता है।
सब कुछ तब बदला जब करण जौहर ने उन्हें ‘कुछ कुछ होता है’ में कास्ट किया। बतौर नए निर्देशक करण पर भी दबाव था, लेकिन उन्होंने रानी की आवाज पर भरोसा दिखाया। यही भरोसा रानी के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
रानी कहती हैं कि उनकी आवाज सिर्फ एक तकनीकी पहलू नहीं थी, बल्कि उनकी पहचान थी। उस पहचान को बचा पाना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं था। करण जौहर के फैसले ने यह साबित कर दिया कि अगर एक इंसान आप पर भरोसा कर ले, तो आपकी किस्मत बदल सकती है।
आज रानी मुखर्जी उसी आवाज के साथ ‘मर्दानी 3’ में एक बार फिर समाज के सबसे अंधेरे अपराधों से लड़ती नजर आएंगी। यह फिल्म न सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर है, बल्कि रानी के तीन दशक लंबे संघर्ष, आत्मविश्वास और पहचान का भी प्रतीक है।