वृंदावन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए संघ प्रमुख मोहन भागवत वृंदावन पहुंच चुके हैं। ब्रज की पावन भूमि पर उनका यह प्रवास केवल बैठक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे करीब सात दिनों तक वृंदावन में रहेंगे। संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस दौरान संगठनात्मक समीक्षा, वैचारिक विमर्श और समसामयिक राष्ट्रीय विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।
RSS की यह महत्वपूर्ण बैठक वृंदावन स्थित केशव धाम परिसर में 6 जनवरी से 8 जनवरी तक आयोजित होगी। बैठक से पहले 5 जनवरी से विभिन्न टोली बैठकों की शुरुआत हो जाएगी, जिनमें संगठन के अलग-अलग आयामों पर विस्तार से मंथन होगा। हर वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह में होने वाली यह बैठक संघ की वार्षिक रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ-साथ सरकार्यवाह दत्तात्रेय होशबाले, छह सह-सरकार्यवाह और लगभग 40 केंद्रीय पदाधिकारी भाग लेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत संघ प्रेरित संगठनों के प्रतिनिधियों को भी विशेष चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है। इन बैठकों में संघ के आगामी कार्यक्रमों, सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाएगा।
संघ से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बार की बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचार, सहकारिता क्षेत्र की भूमिका, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी चुनावों और वहां संगठन की रणनीति को लेकर भी विचार-विमर्श की संभावना जताई जा रही है। वृंदावन प्रवास के दौरान मोहन भागवत कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे। 9 जनवरी को वे चंद्रोदय मंदिर पहुंचेंगे, जहां ठाकुर जी के दर्शन के साथ-साथ गौशाला और रसोई का अवलोकन करेंगे। इसके बाद मंदिर प्रबंधन और संघ पदाधिकारियों के साथ संवाद भी प्रस्तावित है।
इसके अलावा, 10 जनवरी से 21 जनवरी तक नाभापीठ सुदामा कुटी आश्रम का शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत 10 जनवरी को इस समारोह के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह आयोजन और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है।
कुल मिलाकर, वृंदावन में होने वाली यह बैठक न केवल संघ की आंतरिक रणनीति को दिशा देगी, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर संगठन के रुख को भी स्पष्ट करेगी। संघ के लिए यह बैठक आने वाले वर्ष की कार्ययोजना तय करने का आधार मानी जा रही है।