बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) इन दिनों अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पार्टी से बगावत करने वाले एक विधायक ने दावा किया है कि उपेंद्र कुशवाहा अब अपनी बहू साक्षी मिश्रा को भी राजनीतिक पद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
बागी विधायक के अनुसार, मामला राज्य नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष पद से जुड़ा है। यह परिषद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में काम करती है और इसमें दो उपाध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। इनमें से एक पद RLM को मिला था, जिस पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव माधव आनंद को नियुक्त किया गया था।
हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद माधव आनंद विधायक बन गए, जिससे यह पद खाली हो गया। इसी रिक्त पद को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। आरोप है कि उपेंद्र कुशवाहा ने इस पद के लिए अपनी बहू साक्षी मिश्रा का नाम आगे बढ़ाया है, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।
यह पहला मौका नहीं है जब उपेंद्र कुशवाहा पर परिवार को आगे बढ़ाने के आरोप लगे हों। इससे पहले उनके बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने पर भी पार्टी के विधायकों ने नाराजगी जताई थी। खास बात यह रही कि दीपक प्रकाश ने कोई चुनाव नहीं लड़ा था, फिर भी उन्हें मंत्री पद सौंपा गया।
RLM के विधायक रामेश्वर महतो समेत कई नेताओं ने इस फैसले को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है और गलत संदेश जाता है।
अब बहू साक्षी मिश्रा को लेकर उठे सवालों ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार बढ़ते विवाद RLM की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर समय रहते नेतृत्व ने स्थिति नहीं संभाली, तो पार्टी में टूट और गहरी हो सकती है।