लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई है। राज्य में चल रही बिजली बिल राहत योजना में अब उन उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद कभी बिल जमा नहीं किया था (नेवर पेड), लेकिन 1 अप्रैल से 30 नवंबर 2025 के बीच पहली बार भुगतान कर दिया है। पावर कॉरपोरेशन ने इन उपभोक्ताओं को भी राहत के दायरे में शामिल करने का आदेश जारी किया है।
यह योजना 1 दिसंबर से लागू है और इसके तहत घरेलू (अधिकतम 2 किलोवाट) तथा वाणिज्यिक (1 किलोवाट) श्रेणी के उन उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद कभी भी बिल नहीं चुकाया। इसी तरह लंबे समय से भुगतान न करने वाले लांग अनपेड उपभोक्ता भी इसमें शामिल हैं। योजना के तहत उपभोक्ताओं को मूलधन पर 25% की छूट और सभी प्रकार के ब्याज से पूर्णतः मुक्ति दी जाएगी।
हालांकि राहत योजना लागू होने के बाद सामने आया कि कई ‘नेवर पेड’ उपभोक्ताओं ने हाल ही में एक किस्त जमा कर दी, जिसके कारण वे योजना की पात्रता से बाहर हो गए थे। इन शिकायतों को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन ने संशोधन किया है। अब 31 मार्च 2025 तक ‘नेवर पेड’ रहने वाले और 1 अप्रैल से 30 नवंबर 2025 के बीच पहली बार बिल जमा करने वाले उपभोक्ता भी योजना का लाभ ले सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं का पंजीयन 11 दिसंबर से शुरू होगा। पावर कॉरपोरेशन के एमडी पंकज कुमार ने इस संबंध में सभी डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों को निर्देश भेज दिए हैं।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर उपभोक्ता निर्णय करेंगे
स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर भी राज्य भर में चल रही उलझन खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 में स्पष्ट किया था कि उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना चाहते हैं या नहीं, इसका निर्णय उनका व्यक्तिगत विकल्प होगा। इसे जबरन थोपना गलत है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने यह आदेश नियामक आयोग को सौंपते हुए कहा कि ग्राहकों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करना उपभोक्ता हितों के खिलाफ है। उन्होंने आग्रह किया कि उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड और पोस्टपेड में से चुनाव का स्पष्ट विकल्प दिया जाए।
पंजाब केस में भी यही फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब से जुड़े मामले (Civil Appeal 4226/2020) में भी कहा है कि प्रीपेड मीटर लगाना उपभोक्ता की इच्छा पर आधारित विकल्प है, न कि अनिवार्यता। उपभोक्ता यदि प्रीपेड विकल्प चुनते हैं, तो सुरक्षा जमा उन्हें समायोजन के रूप में लौटाया जाएगा।
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि नए कनेक्शन लेने वालों से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर 6016 रुपये की वसूली गलत है और इस पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।