अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सदस्यों में शामिल और भाजपा नेता डॉ. रामविलास वेदांती ने एक बार फिर बड़ा बयान देते हुए केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि अयोध्या की उन सड़कों के नाम बदले जाएं, जिनके नाम मुस्लिम पहचान से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह राम की नगरी है और यहां की हर गली का नाम श्रीराम और उनके वंश से जुड़े इतिहास को दर्शाना चाहिए।
आईएएनएस से बातचीत में डॉ. वेदांती ने कहा कि भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर तैयार हो चुका है और 25 नवंबर को भगवान राम परंपराओं के अनुरूप विराजमान हुए। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए राम मंदिर ने नई पहचान बनाई है, उसी प्रकार अब शहर की गलियों और सड़कों के नाम भी परंपरा के अनुरूप होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “राम की नगरी में राम, राजा दिलीप, राजा रघु और राजा दशरथ जैसे पुरखों के नाम पर सड़कों के नाम रखे जाने चाहिए। किसी भी राम विरोधी के नाम पर गली या मोहल्ले का नाम नहीं होना चाहिए। अयोध्या आने वाला हर व्यक्ति महसूस कर सके कि वह राम की धरती पर पहुंच चुका है।”
डॉ. वेदांती ने यह भी कहा कि कई बार लोग अयोध्या में कदम रखते ही भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि मोहल्लों और गलियों के नाम स्थानीय परंपरा से मेल नहीं खाते। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि अयोध्या की सभी गलियों और सड़कों की सूची मंगवाकर परंपरा के अनुसार नामों में बदलाव किया जाए।
उन्होंने सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि वाराणसी के मोहल्लों और गलियों के नामों में भी बदलाव की मांग की। उनका कहना है कि कई नाम इस्लामीकरण के दौर में बदले गए, जिन्हें अब धार्मिक और ऐतिहासिक आधार पर पुनः सुधारने की आवश्यकता है।
डॉ. वेदांती ने कहा कि आजमगढ़ का नाम आर्यनगर, गाजियाबाद का नाम शंकराचार्य नगर, गाजीपुर का नाम विश्वामित्र नगर और बस्ती का नाम गुरु वशिष्ठ नगर होना चाहिए। साथ ही, शाहजहांपुर का नाम बदलकर परशुरामपुर रखने का सुझाव भी दिया।
उन्होंने कांग्रेस सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में सामाजिक सद्भावना को पीछे छोड़कर ऐसे निर्णय लिए गए, जिनसे समाज में विभाजन की भावना पनपी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित किया जाए और भारत की परंपरा के अनुरूप शहरों और सड़कों का नामकरण किया जाए।