योगी सरकार ने सभी जिलों में डिटेंशन सेंटर बनाने का आदेश दिया

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 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सभी जिलों के अधिकारियों को अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि हर जिले में अस्थायी हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) स्थापित किए जाएँ, जहाँ पहचाने गए घुसपैठियों को रखा जाएगा। इस कदम का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है क्योंकि पश्चिम बंगाल और आने वाले 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के बीच घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर गर्माता हुआ दिखाई दे रहा है।

सरकारी बयान के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून-व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध प्रवासियों की पहचान करने, उनकी जांच करने और कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि या संदिग्ध प्रवास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के सात जिले नेपाल से सटी खुली सीमा साझा करते हैं, जहाँ दोनों देशों के नागरिक स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि अन्य देशों के अवैध निवासी बिना जांच के सीमा पार न कर पाएं। योगी सरकार के इस नए निर्देश से सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किए जाने की उम्मीद है।

पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और अन्य नेताओं द्वारा अवैध घुसपैठ को एक गंभीर मुद्दे के रूप में लगातार उठाया गया है। पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी माहौल और 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधि और बयानबाज़ी और अधिक तेज़ होने की संभावना है। कई राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, घुसपैठियों के मसले को लेकर राज्य में पहले से ही माहौल संवेदनशील बनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित बड़ा कदम

अधिकारियों का मानना है कि हर जिले में डिटेंशन सेंटर बनाना, राज्य की सुरक्षा नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे न केवल अवैध घुसपैठियों पर नज़र रखना आसान होगा बल्कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के पूर्ण होने तक सुरक्षित हिरासत में रखा जा सकेगा। जिला मजिस्ट्रेटों को इस निर्देश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

बिहार में घुसपैठियों पर कार्रवाई का हाल

बिहार में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों (2025) के दौरान भी अवैध घुसपैठियों का मुद्दा सुर्खियों में रहा। चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए Special Intensive Revision (SIR) अभियान के दौरान वोटर लिस्ट की व्यापक जांच की गई। इस प्रक्रिया में मृत, स्थानांतरित और अनट्रेस्ड वोटर्स को हटाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल 47 लाख से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए, लेकिन विदेशी घुसपैठियों की सटीक संख्या पर आयोग ने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। एसआईआर के दौरान 11,000 से अधिक ऐसे वोटर्स मिले, जो ‘अनट्रेस्ड’ श्रेणी में आए और जिनके पास आधार व राशन कार्ड जैसे भारतीय दस्तावेज मौजूद थे। इन पर बांग्लादेशी, रोहिंग्या या नेपाल/म्यांमार से आने के संदेह जताए गए।

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