अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों में भारतीय मूल के नेताओं ने भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ रहा है। इस बार के चुनाव में पिया डंडिया, सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर ने जीत हासिल कर भारतीय मूल के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इन नेताओं की जीत के साथ अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के प्रतिनिधियों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
पिया डंडिया ने फ्लोरिडा में हासिल की जीत
भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक नेता पिया डंडिया ने फ्लोरिडा से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व मरीन सैनिक केसी अस्कार को चुनाव में हराया। घोषित नतीजों के मुताबिक पिया डंडिया को 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 49.1 प्रतिशत मत हासिल हुए।
पिया डंडिया के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे। राजनीति में आने से पहले वह हाई स्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उन्होंने कम आय वाले परिवारों के छात्रों को बेहतर शिक्षा और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक हाई स्कूल की स्थापना भी की थी। उनकी जीत को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया में दोहराया प्रदर्शन
भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक नेता सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव फिर जीत लिया है। 40 वर्षीय सुहास को 61.5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को करीब 36.4 प्रतिशत मत हासिल हुए।
सुहास सुब्रमण्यम इससे पहले भी अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य रह चुके हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं। सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी भी रही है। हरिकेन कैटरीना से प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण के लिए स्वयंसेवकों को संगठित करने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। उनके माता-पिता भारतीय मूल के हैं।
अरुणा मिलर ने भी दर्ज की जीत
भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक नेता अरुणा मिलर ने भी चुनाव में जीत हासिल की है। वह मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर दोबारा चुनी गई हैं। उन्होंने गवर्नर वेस मूर के साथ चुनाव लड़ा और रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब क्रॉफ को हराया।
अरुणा मिलर का जन्म भारत के हैदराबाद में हुआ था। बाद में उनका परिवार अमेरिका में बस गया। अमेरिकी राजनीति में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी जीत से मैरीलैंड के प्रशासनिक नेतृत्व में भारतीय मूल का प्रतिनिधित्व जारी रहेगा।
अमेरिकी राजनीति में बढ़ रही भारतीय मूल के नेताओं की भागीदारी
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के इन नेताओं की जीत ने प्रवासी भारतीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। प्रतिनिधि सभा से लेकर राज्य के कार्यकारी पदों तक भारतीय-अमेरिकी नेताओं की मौजूदगी अमेरिकी राजनीति में उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है। इन चुनावों के नतीजों के बीच भारतीय मूल के नेताओं की सफलता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।