अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों यानी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत हासिल कर लिया है। इस नतीजे के बाद ट्रंप प्रशासन के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चुनाव में मिली हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नतीजों को स्वीकार करने और डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की बात कही है।
सीनेट और हाउस में डेमोक्रेट्स को बहुमत
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में सीनेट की 35 और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदान हुआ। नतीजों में डेमोक्रेट्स ने सीनेट में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी पार्टी ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए बहुमत हासिल किया।
इस चुनाव में डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, ओहायो, नॉर्थ कैरोलिना और कंसास जैसे राज्यों में अहम सीटों पर जीत दर्ज की। इन नतीजों से अमेरिकी संसद में सत्ता का समीकरण बदल गया है।
ट्रंप बोले- डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेंगे
चुनावी नतीजों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह चुनाव परिणामों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ काम करने की इच्छा भी जताई। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेगी और दोनों पक्ष किसी न किसी रास्ते पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।
हालांकि, ट्रंप ने इस चुनाव को अपने राष्ट्रपति कार्यकाल पर जनमत संग्रह मानने से इनकार किया। उन्होंने नतीजों को सीधे अपने खिलाफ फैसला मानने की बात भी नहीं मानी।
ट्रंप ने कहा- मैं चुनाव मैदान में नहीं था
चुनावी नतीजों के बीच ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि वह खुद चुनाव मैदान में नहीं थे। अगर वह चुनाव लड़ रहे होते तो रिपब्लिकन पार्टी भारी बहुमत से जीतती।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक विश्लेषक की भूमिका में उम्मीदवारों की जीत और हार के कारणों पर अच्छी और बुरी दोनों तरह की बातें रखेंगे।
क्या होते हैं अमेरिका के मिडटर्म चुनाव?
अमेरिका में राष्ट्रपति के चार साल के कार्यकाल के बीच यानी दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों पर मतदान होता है। इसके अलावा कई राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव कराए जाते हैं।
इन चुनावों का असर राष्ट्रपति के बाकी दो साल के कार्यकाल पर पड़ता है। संसद के दोनों सदनों में विपक्ष को बहुमत मिलने से राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे, बजट और सरकारी नीतियों से जुड़े फैसलों पर उसका प्रभाव बढ़ जाता है।