नई दिल्ली: भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स ने बड़ी रणनीति तैयार की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो की नजर वित्त वर्ष 2030-31 तक 1.4 ट्रिलियन डॉलर की होने वाली भारतीय डिजिटल इकोनॉमी पर है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी के मुताबिक, प्रस्तावित आईपीओ से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कर्ज घटाने में किया जाएगा। इसके बाद कारोबार के विस्तार के लिए कंपनी अपने ऑपरेशन से होने वाली कमाई और कैश फ्लो पर ज्यादा निर्भर रहेगी।
IPO से कर्ज मुक्त बनने की तैयारी
आकाश अंबानी के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स पर करीब 3 अरब डॉलर का नेट कर्ज है। कंपनी का लक्ष्य प्रस्तावित आईपीओ से मिलने वाली पूरी रकम का इस्तेमाल करके खुद को नेट डेट-फ्री बनाना है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का आईपीओ 37,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है।
कंपनी की योजना है कि कर्ज कम करने के बाद कारोबार के विस्तार के लिए जरूरी पूंजी आंतरिक कमाई से जुटाई जाए। इससे कंपनी को नए प्रोजेक्ट, तकनीकी विकास और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के लिए बाहरी कर्ज पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
कमाई और मुनाफे में सुधार पर जोर
आकाश अंबानी ने बताया कि जियो के राजस्व का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा फ्री कैश फ्लो में बदलता है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल ग्राहकों के लिए नई सुविधाएं विकसित करने और कारोबार के विस्तार में करना चाहती है।
पिछले तीन वर्षों में जियो का EBITDA मार्जिन 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। कंपनी को उम्मीद है कि तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, परिचालन दक्षता और नए डिजिटल उत्पादों से मुनाफे में आगे भी सुधार किया जा सकता है।
मोबाइल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और अन्य डिजिटल सेवाओं को कंपनी भविष्य में कमाई बढ़ाने के प्रमुख माध्यमों के रूप में देख रही है।
डेटा टैरिफ बढ़ाने के बजाय सेवाओं पर फोकस
मोबाइल टैरिफ बढ़ाने की संभावनाओं पर आकाश अंबानी ने कहा कि कंपनी के पास कीमतें बढ़ाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन उसकी प्राथमिकता ग्राहकों को अधिक सेवाएं और बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना है।
जियो की रणनीति केवल मोबाइल डेटा की कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए कमाई बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कंपनी अपनी सेवाओं की उपयोगिता बढ़ाकर ग्राहकों को जोड़े रखने और नए डिजिटल उत्पादों के जरिए कारोबार का विस्तार करने पर भी ध्यान दे रही है।
10 करोड़ घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने की योजना
जियो की UBR तकनीक से कंपनी के होम ब्रॉडबैंड के संभावित बाजार का दायरा बढ़कर 10 करोड़ घरों तक पहुंचने का अनुमान है, जो पहले करीब 4 करोड़ घरों तक सीमित था।
आकाश अंबानी के मुताबिक, इस तकनीक के जरिए ग्राहक की मांग के 48 घंटे के भीतर वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे उन क्षेत्रों में भी ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार करने में मदद मिल सकती है, जहां पारंपरिक फाइबर कनेक्शन पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है।
विदेशों में भी कारोबार बढ़ाने की तैयारी
जियो भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तार के अवसर तलाश रही है। कंपनी विदेशों में स्थानीय टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझेदारी करके अपनी तकनीक और सेवाओं को दूसरे देशों तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
कुल मिलाकर, जियो की रणनीति में प्रस्तावित आईपीओ, कर्ज में कमी, कैश फ्लो के बेहतर इस्तेमाल, ब्रॉडबैंड विस्तार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को प्रमुख स्थान दिया गया है। हालांकि, आईपीओ का वास्तविक आकार और उससे जुड़ी शर्तें आधिकारिक घोषणा तथा नियामकीय दस्तावेजों से स्पष्ट होंगी।