देश में सुरक्षित निवेश और बेहतर रिटर्न के लिए भारतीय डाकघर (Post Office) की बचत योजनाएं हमेशा से लोगों की पहली पसंद रही हैं। सरकारी गारंटी और जोखिम रहित होने के कारण आम नागरिक बिना किसी चिंता के अपनी गाढ़ी कमाई इसमें जमा करते हैं। बैंकों की तरह ही पोस्ट ऑफिस में भी फिक्स डिपॉजिट (FD) की सुविधा मिलती है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘टाइम डिपॉजिट’ (TD) कहा जाता है।
24 महीने की टाइम डिपॉजिट पर मिल रहा है 7.00 फीसदी ब्याज
पोस्ट ऑफिस अपने ग्राहकों को 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के लिए टाइम डिपॉजिट खाते खोलने का विकल्प प्रदान करता है। वर्तमान में पोस्ट ऑफिस 24 महीने यानी 2 साल की एफडी पर 7.00 प्रतिशत की दर से आकर्षक वार्षिक ब्याज दे रहा है। इस योजना में एकमुश्त राशि जमा की जाती है और मैच्योरिटी पूरा होने पर मूलधन के साथ तय ब्याज की रकम वापस मिल जाती है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से ज्यादा ब्याज का प्रावधान नहीं
आमतौर पर देश के प्रमुख बैंक वरिष्ठ नागरिकों (60 वर्ष या उससे अधिक) को सामान्य ग्राहकों की तुलना में 0.50% तक का अतिरिक्त ब्याज देते हैं। कई बैंक सुपर सीनियर सिटीजंस (80 वर्ष से अधिक) को और भी अधिक रिटर्न प्रदान करते हैं। हालांकि, पोस्ट ऑफिस की नीति इससे अलग है। डाकघर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी पर कोई अलग या विशेष दर लागू नहीं होती है; सभी आयु वर्ग के निवेशकों को 2 साल की एफडी पर एक समान 7.00% का ब्याज ही मिलता है।
वित्त मंत्रालय तय करता है ब्याज दरें, रेपो रेट का नहीं होता सीधा असर
बैंकों की एफडी ब्याज दरें मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट में होने वाले बदलावों से प्रभावित होती हैं। वहीं दूसरी ओर, पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं की ब्याज दरें भारत सरकार का वित्त मंत्रालय तय करता है। वित्त मंत्रालय हर तिमाही (हर 3 महीने) में इन दरों की समीक्षा करता है और आवश्यकतानुसार संशोधन करता है। इसी वजह से डाकघर की योजनाओं में ब्याज दरें अधिक स्थिर मानी जाती हैं।