हिन्दी सिनेमा के महान अभिनेता देव आनंद के बेटे और नवकेतन फ़िल्म्स के देखरेखकर्ता सुनील आनंद का लंदन में हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे। परिवार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में उनके देहांत की पुष्टि की गई है। यह खबर फिल्म‑जगत और प्रशंसकों के लिए एक दुःखद क्षण है।
परिवार ने क्या कहा
देव आनंद की नातिन जीना नारंग ने ऑफिशियल बयान जारी कर बताया कि परिवार भारी मन से सुनील आनंद के निधन की पुष्टि करता है और इस कठिन समय में निजी गोपनीयता बनाए रखने की अपील करता है। परिवार ने मिलने वाले प्रेम, संवेदना और प्रार्थनाओं के लिए आभार भी जताया।
सुनील आनंद का फिल्मी सफर
आरम्भ और एक्टिंग: सुनील आनंद ने 1984 की फिल्म “आनन्द और आनन्द” से बॉलीवुड में कदम रखा, जिसमें उनके साथ उनके पिता देव आनंद भी थे। इसके बाद वे ‘कार थेफ’ और ‘मैं तेरे लिए’ जैसी फिल्मों में दिखे। हालांकि इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर खास कमाई नहीं की, फिर भी उन्होंने पितृ‑विरासत और सिने जगत में अपनी जगह बनाये रखी।
नवकेतन फ़िल्म्स का दायित्व: फिल्मों में अपने सक्रिय करियर के बाद सुनील ने अपने पिता के प्रोडक्शन हाउस नवकेतन फ़िल्म्स की देखरेख पर काम किया और पारिवारिक विरासत संभाली। वे लंबे समय तक परिवार‑विरोधी शोर‑शराबे से दूर रहे और परिजनों के साथ जुड़े रहे।
सार्वजनिक रूप से यादें: सितंबर 2023 में देव आनंद की 100वीं जयंती पर सुनील ने अपने पिता को याद करते हुए कई यादगार किस्से साझा किये थे और बतलाया था कि उन्होंने कितने वर्षों तक अपने पिता की विरासत को सँभाला।
देव आनंद की विरासत
देव आनंद हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं और उन्हें बॉलीवुड का पहला फैशन‑आइकॉन भी माना जाता है। उनकी ऐतिहासिक फिल्मों में ‘प्रेम पुजारी’, ‘गाइड’, ‘मंजिल’ और ‘हरे कृष्णा हरे रामा’ शामिल हैं। सुनील की पारिवारिक पहचान और नवकेतन से जुड़ाव ने उन्हें भारतीय फिल्म‑परिवार की एक अहम कड़ी बनाए रखा।
समाचार का असर और अगला कदम
शोक और श्रद्धांजलि: फिल्म इंडस्ट्री, करीबी परिचित और प्रशंसक सोशल मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं; कई पुराने सहकर्मियों की टिप्पणी और यादें आनी शुरू हो चुकी हैं।
अंतिम संस्कार/समाचार: परिवार की ओर से आगे कब और कहाँ अंतिम संस्कार या अंतिम संस्कार‑सम्बंधी जानकारी जारी होगी, इस पर विस्तृत आधिकारिक सूचना का इंतजार है।
नवकेतन फ़िल्म्स पर असर: सुनील के निधन के बाद नवकेतन हाउस की व्यवस्थाएँ और पारिवारिक‑विरासत के अगली पीढ़ी के कदम पर ध्यान रहेगा; परिवार के बयानों का इंतजार रहेगा।