मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। बैंगन की बंपर पैदावार होने के बावजूद किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल को खेतों में ही नष्ट करने के लिए मजबूर हो गए हैं। कुछ किसान बैंगन को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कई किसानों ने फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे खत्म कर दिया है।
करी गांव के किसान राधेश्याम गेहलोद ने बताया कि उन्होंने इस सीजन में चार बीघा जमीन पर बैंगन की खेती की थी। बेहतर उत्पादन की उम्मीद में उन्होंने खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी पर करीब दो लाख रुपये खर्च किए थे। फसल भी अच्छी हुई, लेकिन जब वह बैंगन लेकर मंडी पहुंचे तो वहां उन्हें बेहद कम कीमत मिली। मंडी में बैंगन का भाव लगभग एक रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया, जिससे उनकी लागत निकालना भी संभव नहीं हो पाया।
राधेश्याम के अनुसार, वह 50 से 60 बोरी बैंगन लेकर मंडी पहुंचे थे। प्रत्येक बोरी में करीब 50 से 60 किलो बैंगन था। उन्हें उम्मीद थी कि बैंगन का दाम कम से कम 10 से 12 रुपये प्रति किलो मिलेगा, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग निकली। लगातार घाटे को देखते हुए उन्होंने अपनी पूरी फसल पर ट्रैक्टर चलाकर उसे नष्ट कर दिया।
किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन अधिक होने से बाजार में बैंगन की आपूर्ति बढ़ गई है। दूसरी ओर खरीददारों की संख्या कम होने के कारण कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। किसान बताते हैं कि मौजूदा भाव पर फसल की तुड़ाई और परिवहन का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
राधेश्याम के बेटे दीपक गेहलोद का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। परिवहन लागत बढ़ने के कारण बाहर के व्यापारी स्थानीय मंडियों से माल खरीदने नहीं आ रहे हैं। पिछले कई दिनों से मंडी में बैंगन पहुंच रहा है, लेकिन उसकी पर्याप्त निकासी नहीं हो पा रही है। इससे बाजार में माल की अधिकता और कीमतों में गिरावट बनी हुई है।
कई किसानों का मानना है कि यदि उन्हें न्यूनतम लाभकारी मूल्य मिलता तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती। वर्तमान में किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और अगली फसल की तैयारी भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि सब्जी उत्पादकों के लिए विशेष सहायता योजना बनाई जाए ताकि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।